PoK में प्रदर्शन: ‘हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं हैं’, ₹1 करोड़ का इनामी शौकत नवाज गिरफ्तार; 600 से ज्यादा नेता हिरासत में
PoK में प्रदर्शन: शाहबाज सरकार के खिलाफ फूटा जनता का गुस्सा, इंटरनेट बंद और हिंसा में अब तक 22 लोगों की मौत का दावा
PoK में प्रदर्शन: पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जनता ने खोला सीधा मोर्चा
PoK में प्रदर्शन इस समय एक ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है जिसने इस्लामाबाद से लेकर वैश्विक स्तर तक सनसनी मचा दी है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में वहां की दमनकारी सरकार और सेना के खिलाफ स्थानीय नागरिकों का गुस्सा पूरी तरह से ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा है। मंगलवार को रावलकोट के ऐतिहासिक ईदगाह ग्राउंड में हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे और उन्होंने एक सुर में पाकिस्तान विरोधी नारे लगाए। इस बड़े एकत्रीकरण के दौरान प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में दुनिया के सामने यह ऐलान कर दिया कि “PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है”। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने इस आंदोलन को दबाने के लिए क्रूर रवैया अपनाया है। आंदोलन की अगुआई कर रही जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर को उनके दो साथियों के साथ धीरकोट के सांगर फत्तारे इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके साथ ही पूरे क्षेत्र से JAAC के 600 से अधिक नेताओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया है, जिससे पूरे इलाके में भारी तनाव व्याप्त है।
यह आंदोलन अब केवल एक स्थानीय विरोध प्रदर्शन नहीं रह गया है, बल्कि इसने एक बड़े राजनीतिक और स्वतंत्रता आंदोलन का रूप ले लिया है। पाकिस्तान सरकार ने इस आंदोलन की गूंज को दबाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। अवामी एक्शन कमेटी के प्रमुख शौकत नवाज मीर और अन्य शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी के लिए सरकार ने पहले ही 1 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा कर रखी थी। जैसे ही मीर की गिरफ्तारी की खबर फैली, पूरे रावलकोट, मीरपुर और मुजफ्फराबाद के इलाकों में लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अब पाकिस्तान के इस अवैध कब्जे और आर्थिक शोषण को और अधिक बर्दाश्त नहीं करेंगे।
‘हमें आपके राशन की जरूरत नहीं, आपको हमारी जरूरत है’
रावलकोट में हुए इस विशाल प्रदर्शन के दौरान जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के फायरब्रांड नेता सरदार अमन खान ने मंच से पाकिस्तान सरकार को सीधे तौर पर ललकारा। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा, ‘हमें पाकिस्तान के किसी राशन या खैरात की जरूरत नहीं है, बल्कि सच तो यह है कि पाकिस्तान को हमारी और हमारे संसाधनों की जरूरत है। हमारे पानी से बिजली बनाकर पाकिस्तान खुद रोशन होता है और हमें अंधेरे और कंगाली में धकेल दिया गया है।’
अमन खान ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर पाकिस्तान सरकार द्वारा क्षेत्र में जरूरी सामानों की सप्लाई को इसी तरह जानबूझकर बंद रखा गया, तो यहाँ के लोग जिंदा रहने के लिए कोई दूसरा रास्ता चुनने पर मजबूर हो जाएंगे। स्थानीय नेताओं का सीधा आरोप है कि पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार इस शांतिपूर्ण जन-आंदोलन को कुचलने के लिए जानबूझकर खाद्यान्न, दवाओं और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को रोक रही है ताकि लोग भूख से तंग आकर घरों में बैठ जाएं।
महंगाई के विरोध से शुरू हुआ आंदोलन अब बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
इतिहास और इस आंदोलन की कड़ियों पर नजर डालें तो यह बात साफ होती है कि इस व्यापक विरोध प्रदर्शन की शुरुआत मूल रूप से अत्यधिक महंगाई, गंभीर खाद्य संकट, आटे और बिजली की बढ़ती कीमतों तथा स्थानीय प्रशासन के भ्रष्टाचार के खिलाफ हुई थी। वर्ष 2023 में प्रॉपर्टी टैक्स लगाने के फैसले के खिलाफ इस संगठन (JAAC) की स्थापना की गई थी जिसके अध्यक्ष 50 वर्षीय शौकत नवाज मीर हैं। लेकिन धीरे-धीरे यह जनता के वजूद की लड़ाई बन गया और अब यह सीधे तौर पर पाकिस्तान सरकार के खिलाफ एक बहुत बड़े राजनीतिक विरोध का रूप ले चुका है।
इस आग में घी डालने का काम पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक विवादित बयान ने किया। हाल ही में रक्षा मंत्री ने रावलकोट और मीरपुर के प्रदर्शनकारी लोगों को ‘असल कश्मीरी नहीं’ बताकर उनका अपमान किया था। इस बयान के सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र के लोगों का स्वाभिमान आहत हुआ और विरोध की लपटें दोगुनी रफ्तार से भड़क उठीं। सरकार ने इस आंदोलन को कुचलने के लिए दमनकारी नीतियों का सहारा लेते हुए JAAC के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं पर सीधे आतंकवाद विरोधी कानून (Anti-Terrorism Act) के तहत मुकदमे दर्ज कर दिए हैं। इतना ही नहीं, 5 जून 2026 को पाकिस्तान सरकार ने इस पूरे संगठन (JAAC) को ही ‘प्रतिबंधित संगठन’ घोषित कर दिया, जिसके बाद से पूरे क्षेत्र में सैन्य बल तैनात हैं और तनाव चरम पर है।
इंटरनेट पूरी तरह ठप, हिंसा में 22 से अधिक मौतों का दावा
स्थानीय स्तर से छनकर आ रही मीडिया रिपोर्ट्स और मानवाधिकार संगठनों के दावों के मुताबिक, जून 2026 की शुरुआत से ही PoK के अधिकांश संवेदनशील इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं पूरी तरह से बंद या सीमित कर दी गई हैं। प्रदर्शनकारियों और स्थानीय पत्रकारों का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना और पुलिस द्वारा की जा रही बर्बरता की तस्वीरें, वीडियो और असल सच्चाई दुनिया के सामने न आ सके, इसलिए इस डिजिटल नाकाबंदी को अंजाम दिया गया है।
पिछले दो हफ्तों के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों (रेंजर्स और स्थानीय पुलिस) के बीच हुई हिंसक झड़पों में अब तक कम से कम 22 निर्दोष स्थानीय लोगों की मौत होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, जमीनी हालात इससे भी कहीं अधिक बदतर बताए जा रहे हैं। इससे पहले 12 जून को भी हुई झड़पों में 46 प्रदर्शनकारियों की मौत और 1100 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई थी। पाकिस्तान सरकार इस पूरे क्षेत्र को एक खुली जेल में तब्दील कर चुकी है जहां बुनियादी अधिकारों का सरेआम हनन हो रहा है।
27 जुलाई को होने वाले विधानसभा चुनावों पर संकट के बादल
इस अभूतपूर्व हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के बीच, गिलगित-बाल्टिस्तान के बाद अब आगामी 27 जुलाई को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव कराए जाने की घोषणा की गई है। आपको बता दें कि PoK विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं, जिनमें से 45 सीटों पर सीधे जनता द्वारा मतदान के माध्यम से प्रतिनिधि चुने जाते हैं, जबकि शेष 8 सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित रखी गई हैं।
परंतु, जिस तरह से वर्तमान में संपूर्ण PoK की जनता पाकिस्तान की शासन व्यवस्था के खिलाफ बगावत पर उतर आई है, उसे देखते हुए इन चुनावों के शांतिपूर्ण आयोजन पर बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है। स्थानीय जनता का कहना है कि वे पाकिस्तान की इस कठपुतली लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पूरी तरह बहिष्कार करेंगे। बक्सर और शाहपुर की क्षेत्रीय खबरों से अलग, यह अंतरराष्ट्रीय खबर आपकी वेबसाइट के पाठकों को वैश्विक और रणनीतिक मुद्दों से जोड़ेगी।
मुख्य घटना: PoK के रावलकोट में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ हजारों लोगों का विशाल प्रदर्शन。
बड़ा नारा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- ‘हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं हैं, हमें तुम्हारा राशन नहीं चाहिए’।
बड़ी गिरफ्तारी: JAAC के प्रमुख शौकत नवाज मीर गिरफ्तार, सरकार ने रखा था 1 करोड़ का इनाम।
दमनकारी नीति: 600 से ज्यादा नेता हिरासत में, संगठन पर प्रतिबंध और इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप।
हताहत: प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प में अब तक 22 से अधिक लोगों की मौत का दावा।

