नोएडा पीजी अग्निकांड: ई-स्कूटी बैटरी विस्फोट से मची तबाही, छह मिनट में पांच मंजिला इमारत बनी आग का गोला, दो की दर्दनाक मौत
नोएडा पीजी अग्निकांड में सेक्टर-66 स्थित ममूरा गांव की पीजी बिल्डिंग में चार्जिंग के दौरान ई-स्कूटी की बैटरी फटने से लगी भीषण आग, 100 से अधिक लोगों का रेस्क्यू, दो युवाओं की मौत, पीजी संचालक गिरफ्तार, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल।
नोएडा पीजी अग्निकांड: छह मिनट में भूतल से पांचवीं मंजिल तक पहुंची आग, दो लोगों की मौत, 100 से अधिक लोगों को बचाया गया
नोएडा। गौतम बुद्ध नगर के सेक्टर-66 स्थित ममूरा गांव में बुधवार को हुआ नोएडा पीजी अग्निकांड पूरे एनसीआर को झकझोर देने वाला साबित हुआ। एक पांच मंजिला पेइंग गेस्ट (पीजी) भवन में चार्जिंग के दौरान इलेक्ट्रिक स्कूटी की बैटरी में हुए विस्फोट ने कुछ ही मिनटों में पूरे भवन को आग और धुएं की चपेट में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार केवल छह मिनट के भीतर आग भूतल से पांचवीं मंजिल तक फैल गई। इस दर्दनाक हादसे में बिहार निवासी स्नेहा श्रीवास्तव (22) और मध्यप्रदेश निवासी ऋषभ (26) की मौत हो गई, जबकि 100 से अधिक लोगों को दमकल विभाग, पुलिस और स्थानीय नागरिकों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया।
यह हादसा केवल एक आगजनी की घटना नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती बहुमंजिला पीजी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न भी खड़ा करता है।
चार्जिंग के दौरान हुआ विस्फोट, कुछ ही मिनटों में मच गई अफरा-तफरी
प्रारंभिक जांच के अनुसार घटना की शुरुआत ग्राउंड फ्लोर पर चार्जिंग के दौरान खड़ी एक ई-स्कूटी की बैटरी में तेज धमाके से हुई। विस्फोट के तुरंत बाद आग ने आसपास खड़े दोपहिया वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते आग की लपटें और घना धुआं पूरी इमारत में फैलने लगा।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धमाके के बाद लोगों को बाहर निकलने का अवसर तक नहीं मिला। कई लोग अपने कमरों में फंस गए जबकि कुछ लोग किसी तरह सीढ़ियों तक पहुंचे। धुएं के कारण सांस लेना मुश्किल हो गया और पूरी इमारत में चीख-पुकार मच गई।
छह मिनट में पांचवीं मंजिल तक पहुंची आग
आग की सबसे भयावह बात उसकी रफ्तार रही। चश्मदीदों के अनुसार ग्राउंड फ्लोर पर लगी आग ने महज छह मिनट के भीतर पांचवीं मंजिल तक पूरे भवन को धुएं और लपटों से भर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि बंद गलियारे, पर्याप्त वेंटिलेशन का अभाव और भवन में अग्निशमन व्यवस्था न होने के कारण आग तेजी से ऊपर की ओर फैली।
जान बचाने के लिए लोग छतों पर पहुंचे, कई ने लगाई छलांग
धुआं बढ़ने के साथ ही कई लोग अपने कमरों से निकलकर छतों पर पहुंच गए। कुछ लोगों ने पड़ोसी इमारतों तक पहुंचने के लिए छतों के बीच छलांग लगाई, जबकि स्थानीय लोगों ने सीढ़ियां लगाकर कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
कई युवाओं ने बताया कि यदि कुछ मिनट और देरी हो जाती तो मृतकों की संख्या कहीं अधिक हो सकती थी।
दमकल विभाग का दो घंटे तक चला रेस्क्यू अभियान
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की सात गाड़ियां, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। संकरी गलियों के कारण राहत कार्य में शुरुआती कठिनाई आई, लेकिन लंबी पाइपलाइन, हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और विशेष सीढ़ियों की मदद से फंसे लोगों को बाहर निकाला गया।
करीब दो घंटे तक चले अभियान के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका।
दो युवाओं की दर्दनाक मौत
हादसे में बिहार की रहने वाली 22 वर्षीय स्नेहा श्रीवास्तव और मध्यप्रदेश निवासी ऋषभ (26 वर्ष) की मौत हो गई।
दोनों भवन के अंदर धुएं और आग की चपेट में आ गए थे। उन्हें बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन गंभीर रूप से झुलसने के कारण उनकी जान नहीं बच सकी।
यह हादसा उनके परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति बन गया।
250 से अधिक लोग रहते थे भवन में
जानकारी के अनुसार जिस इमारत में आग लगी, उसमें पीजी और किराये के कमरों सहित लगभग 250 से अधिक लोग रहते थे।
यहां बड़ी संख्या में छात्र, निजी कंपनियों में कार्यरत युवक-युवतियां तथा परिवार रह रहे थे।
यदि समय रहते राहत अभियान शुरू न होता तो यह हादसा और भी भयावह हो सकता था।
18 से अधिक वाहन और लाखों का सामान जलकर राख
आग में ग्राउंड फ्लोर पर खड़े 18 से अधिक दोपहिया वाहन पूरी तरह जल गए।
इसके अलावा अनेक कमरों में रखा—
लैपटॉप
मोबाइल फोन
कपड़े
नकदी
घरेलू सामान
शैक्षणिक प्रमाणपत्र
आधार कार्ड
बैंक दस्तावेज
पासपोर्ट
भी आग की भेंट चढ़ गए।
पीड़ितों का कहना है कि वर्षों की जमा पूंजी कुछ ही मिनटों में राख हो गई।
अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि भवन में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।
बताया जा रहा है कि—
फायर एनओसी की स्थिति की जांच की जा रही है।
पर्याप्त अग्निशमन यंत्र उपलब्ध नहीं थे।
आपातकालीन निकास व्यवस्था सीमित थी।
भवन में रहने वालों को किसी प्रकार का सुरक्षा प्रशिक्षण नहीं दिया गया था।
यदि अग्नि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया गया होता तो संभवतः नुकसान कम हो सकता था।
पीजी संचालक गिरफ्तार
घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए पीजी संचालक कृष्णा कुमार को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस भवन निर्माण, सुरक्षा मानकों, लाइसेंस और अन्य आवश्यक अनुमतियों की भी जांच कर रही है।
यदि जांच में गंभीर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
स्थानीय लोगों की भूमिका बनी जीवनरक्षक
हादसे के दौरान स्थानीय लोगों ने भी बहादुरी का परिचय दिया।
कई लोगों ने अपनी इमारतों की छतों से सीढ़ियां लगाकर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। कुछ लोगों ने दमकल विभाग के पहुंचने से पहले ही कई युवाओं की जान बचाई।
स्थानीय नागरिकों की तत्परता के कारण बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित निकाला जा सका।
बढ़ती ई-स्कूटी संख्या के बीच सुरक्षा पर नई बहस
देशभर में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि चार्जिंग के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद आवश्यक है।
विशेष रूप से बहुमंजिला इमारतों, पीजी, हॉस्टल और अपार्टमेंट में—
अलग चार्जिंग जोन,
उचित वायरिंग,
फायर अलार्म,
स्मोक डिटेक्टर,
अग्निशमन यंत्र,
नियमित सुरक्षा ऑडिट
जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य होनी चाहिए।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
नोएडा पीजी अग्निकांड ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों में केवल भवन निर्माण पर्याप्त नहीं है। सुरक्षा मानकों का कठोर पालन भी उतना ही आवश्यक है।
प्रशासन अब ऐसे सभी पीजी, हॉस्टल और बहुमंजिला भवनों की जांच की तैयारी कर रहा है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।
निष्कर्ष
नोएडा पीजी अग्निकांड केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है। दो परिवारों ने अपने बच्चों को हमेशा के लिए खो दिया, दर्जनों लोगों की वर्षों की मेहनत कुछ मिनटों में राख हो गई और सैकड़ों लोगों ने मौत को बेहद करीब से देखा।
अब आवश्यकता केवल जांच और कार्रवाई की नहीं, बल्कि ऐसे ठोस सुरक्षा उपायों की है जिनसे भविष्य में किसी परिवार को इस तरह की त्रासदी का सामना न करना पड़े। प्रशासन, भवन संचालकों और आम नागरिकों—सभी की साझा जिम्मेदारी है कि अग्नि सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

