सियासत के लिए सनातन से नफरत क्यों?”— विधायक शलभमणि त्रिपाठी ने राजकुमार भाटी को घेरा; ब्राह्मणों और महिलाओं पर टिप्पणी को लेकर छिड़ा संग्राम!

लखनऊ/यूपी: एक टीवी डिबेट के दौरान उत्तर प्रदेश की राजनीति के दो दिग्गज चेहरे आमने-सामने आ गए। भाजपा विधायक शलभमणि त्रिपाठी ने समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी को उनके पुराने बयानों और खास तौर पर ब्राह्मण समाज व महिलाओं के प्रति उनकी टिप्पणियों को लेकर जमकर लताड़ा।
“सनातन पर बोलने का हक किसने दिया?”
बहस के दौरान शलभमणि त्रिपाठी ने राजकुमार भाटी की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा, “भाटी साहब खुद स्वीकार करते हैं कि वो मंदिर नहीं जाते और हिंदुत्व में उनकी आस्था नहीं है। तो मेरा सवाल यह है कि अगर आप खुद को इस संस्कृति से दूर रखते हैं, तो फिर आपको हिंदुओं और सनातन धर्म पर टिप्पणी करने का अधिकार किसने दिया?” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग सिर्फ राजनीति चमकाने के लिए हिंदू धर्म का मजाक उड़ाते हैं।
ब्राह्मण समाज के सम्मान की बात:
ब्राह्मणों को लेकर चल रही चर्चा पर शलभमणि ने गर्व से कहा कि ब्राह्मण समाज कभी किसी की सियासी दया का मोहताज नहीं रहा है। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि आचार्य चाणक्य से लेकर आज तक, ब्राह्मणों ने अपनी मेधा और बौद्धिक क्षमता के दम पर राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि जेएनयू की दीवारों पर ‘ब्राह्मणों भारत छोड़ो’ लिखने वालों की हैसियत नहीं है कि वो इस समाज को पीछे धकेल सकें।
महिलाओं के सम्मान पर कड़ा सवाल:
डिबेट का सबसे कड़ा हिस्सा तब आया जब शलभमणि ने राजकुमार भाटी द्वारा महिलाओं के लिए इस्तेमाल किए गए एक विवादित शब्द पर आपत्ति जताई। उन्होंने सीधे शब्दों में पूछा, “भाटी भाई, जिस शब्द का प्रयोग आपने महिलाओं के लिए किया है, क्या आप अपने परिवार की महिलाओं के लिए वो शब्द इस्तेमाल कर सकते हैं? मेरी तो इतनी हिम्मत नहीं है।”
निष्कर्ष:
शलभमणि त्रिपाठी ने साफ किया कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन समाज को जातियों में बांटना और महिलाओं का अपमान करना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस बहस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यूपी की राजनीति में आने वाले दिनों में ‘सम्मान’ और ‘संस्कृति’ के मुद्दे और भी गरम होने वाले हैं।