ग्रेटर नोएडा में कोहराम: खाना खाने के बाद दो मासूम भाई-बहन की मौत, मां जिंदगी और मौत के बीच जंग में

रबूपुरा में एक ही परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं; बिसरा जांच के लिए लैब भेजा गया, फूड पॉइजनिंग या कोई और वजह?

रबूपुरा/ग्रेटर नोएडा | 10 जून 2026 | UP News Network विशेष रिपोर्ट
ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा कस्बे से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। शांतिनगर मोहल्ले में रहने वाले एक परिवार की खुशियां कुछ ही घंटों में मातम में बदल गईं। रविवार रात परिवार के सदस्यों द्वारा भोजन करने के बाद अचानक तबीयत बिगड़ने लगी। पहले बच्चों को उल्टियां शुरू हुईं और फिर हालत इतनी गंभीर हो गई कि 8 वर्षीय दीपांशी और 6 वर्षीय प्रिंस ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। वहीं उनकी मां रूबी अब भी अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती हैं और जिंदगी की जंग लड़ रही हैं।
इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे रबूपुरा क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि परिवार पूरी तरह सामान्य था और किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ घंटों बाद इतना बड़ा हादसा हो जाएगा।
परिजनों के अनुसार रविवार रात परिवार के सदस्यों ने घर में बना भोजन किया था। देर रात बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। शुरुआत में सामान्य बीमारी समझकर दवा दी गई, लेकिन हालत लगातार खराब होती चली गई। तड़के 3 बजे 8 वर्षीय दीपांशी को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिवार अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि कुछ घंटों बाद 6 वर्षीय प्रिंस की हालत भी बिगड़ गई। उसे भी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। सोमवार शाम को प्रिंस की भी मौत हो गई।
सबसे भावुक और पीड़ादायक स्थिति बच्चों की मां रूबी की है। वह स्वयं अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती हैं। परिवार के लोगों ने उन्हें अभी तक यह नहीं बताया है कि उनके दोनों बच्चों की मौत हो चुकी है। परिजनों का कहना है कि उनकी हालत इतनी नाजुक है कि यह सदमा उन्हें और गंभीर स्थिति में पहुंचा सकता है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि यदि यह फूड पॉइजनिंग का मामला है तो उसी भोजन को खाने वाले अन्य लोगों की हालत सामान्य क्यों है? मृतक बच्चों के चाचा विकास तोमर ने बताया कि परिवार के कई सदस्यों ने वही भोजन किया था। घर में बने पास्ता, फल और अन्य खाद्य पदार्थ परिवार के अन्य लोगों ने भी खाए थे। ऐसे में सिर्फ दो बच्चों और उनकी मां की हालत गंभीर क्यों हुई, यह बात परिवार की समझ से परे है।
घटना के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर घर में रखे खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र किए हैं। पास्ता, फल और अन्य खाद्य सामग्री के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।
मामले को और रहस्यमयी तब बना दिया जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्चों की मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया। डॉक्टरों की टीम ने दोनों बच्चों का बिसरा सुरक्षित रख लिया है और उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। अब पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और परिवार की निगाहें इसी रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
स्थानीय पुलिस का कहना है कि जांच केवल फूड पॉइजनिंग तक सीमित नहीं रखी गई है। हर संभावित एंगल से मामले की पड़ताल की जा रही है। पुलिस यह भी जानने का प्रयास कर रही है कि कहीं कोई अन्य कारण तो इस घटना के पीछे नहीं है।
मंगलवार को जब दोनों बच्चों के अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी, तब पूरे मोहल्ले का माहौल बेहद गमगीन था। महिलाओं की चीख-पुकार और परिजनों का विलाप हर किसी की आंखें नम कर रहा था। जो घर कुछ दिन पहले बच्चों की किलकारियों से गूंजता था, वहां अब केवल सन्नाटा और दर्द दिखाई दे रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच करानी चाहिए ताकि सच्चाई जल्द सामने आ सके। फिलहाल पूरा रबूपुरा कस्बा एक ही सवाल पूछ रहा है—आखिर उस रात ऐसा क्या हुआ जिसने कुछ ही घंटों में दो मासूम बच्चों की जिंदगी छीन ली?
अब सभी की निगाहें फॉरेंसिक जांच और लैब रिपोर्ट पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि रिपोर्ट आने के बाद इस रहस्यमयी मामले की असली वजह सामने आ सकेगी और परिवार को न्याय मिल सकेगा।
(UP News Network इस मामले की हर अपडेट पर नजर बनाए हुए है। जैसे ही फॉरेंसिक रिपोर्ट और जांच से जुड़े नए तथ्य सामने आएंगे, पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाए जाएंगे।)

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