निदा खान मामले पर नीतीश राणे का तीखा प्रहार: खरात मामले का दिया हवाला; कहा—’अपराध के आरोपों में धर्म की आड़ लेना न्याय के साथ धोखा’
मुंबई / नोएडा (UP News Network):
महाराष्ट्र के प्रमुख राजनेता नीतीश राणे का एक हालिया बयान इस समय राजनैतिक और सामाजिक हलकों में भारी चर्चा का विषय बन गया है। निदा खान मामले को लेकर नीतीश राणे ने धर्म, कानून और समाज की जवाबदेही पर कई तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दो अलग-अलग मामलों की तुलना करते हुए समाज के एक बड़े हिस्से के रवैये पर उंगली उठाई है, जिससे सोशल मीडिया पर निष्पक्ष न्याय को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।
अशोक खरात मामले का दिया हवाला
अपने बयान में नीतीश राणे ने अतीत के एक घटनाक्रम का ज़िक्र करते हुए कहा कि जब तथाकथित धर्मगुरु अशोक खरात को महिलाओं से छेड़छाड़ और अमर्यादित व्यवहार के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया था, तो समूचा हिंदू समाज उसके खिलाफ खड़ा हो गया था। उन्होंने रेखांकित किया कि किसी भी हिंदू संगठन या नागरिक ने आरोपी का समर्थन नहीं किया, बल्कि बहुसंख्यक समाज ने उसके लिए कानूनन कड़ी से कड़ी सजा और यहाँ तक कि मृत्युदंड की भी मांग की थी।
निदा खान मामले पर उठाए गंभीर सवाल
इसी संदर्भ को आगे बढ़ाते हुए नीतीश राणे ने निदा खान टीसीएस (TCS) प्रकरण पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एक तरफ जहाँ निदा खान पर इस मामले में गंभीर आरोप लगे हैं और वे आरोपी के तौर पर देखी जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम समाज का एक बड़ा हिस्सा उनके समर्थन में खड़ा दिखाई दे रहा है। राणे ने तीखा प्रहार करते हुए कहा, “यही हमारे और उनके समाज के बीच का बुनियादी अंतर है।” उन्होंने साफ किया कि यदि किसी भी व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगे हों, तो धर्म या समुदाय के आधार पर उसका बचाव कतई नहीं होना चाहिए, बल्कि कानून को पूरी स्वतंत्रता से अपना काम करने देना चाहिए।
क्या कहते हैं आलोचक और सामाजिक विश्लेषक?
नीतीश राणे के इस बयान के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कानून की समानता को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राजनैतिक विश्लेषकों और आलोचकों का भी मानना है कि किसी भी धर्म, समुदाय या संस्था से जुड़ा व्यक्ति यदि कानूनी जांच के दायरे में है, तो समाज द्वारा उसका अंधा समर्थन करना गलत परंपरा को जन्म देता है। देश का कानून सबके लिए बराबर है और जांच पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए। धर्म या वर्ग की आड़ लेकर किसी भी अपराध या आरोप को छिपाने का प्रयास समाज, संविधान और न्याय व्यवस्था तीनों के साथ बड़ा धोखा है।

