ट्विशा शर्मा हत्याकांड: नोएडा की बेटी पर भोपाल में ज़ुल्म; रसूख या कत्ल? सीएम योगी से दरिंदों पर सख्त कार्रवाई की मांग
ग्रेटर नोएडा की बेटी का भोपाल में खौफनाक अंत: जज-वकील ससुराल के रसूख के आगे क्या दफन हो जाएगी ट्विशा की चीख?
ग्रेटर नोएडा (UP News Network): उत्तर प्रदेश का शो-विंडो कहे जाने वाले ग्रेटर नोएडा और नोएडा में जिस तरह के दिल दहला देने वाले मामले लगातार सामने आ रहे हैं, उसे देखकर अब ऐसा लगने लगा है कि कुछ लोगों की मानसिकता पूरी तरह से भ्रष्ट और खोखली हो चुकी है। कानून का खौफ जैसे इन रसूखदारों के दिमाग से बिल्कुल खत्म हो चुका है। UP News Network उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से हाथ जोड़कर यही प्रार्थना और विशेष निवेदन करता है कि महाराज, नोएडा की इन बेटियों के साथ ज़ुल्म करने वाले ऐसे दरिंदों पर और कानून से खिलवाड़ करने वाले रसूखदारों पर ऐसी सख्त से सख्त और ऐतिहासिक कार्रवाई की जाए, कि भविष्य में कोई भी रसूखदार किसी भी बेटी के साथ ऐसा खौफनाक कदम उठाने से पहले एक हजार बार सोचे!
मौत से 30 मिनट पहले का वो रहस्यमयी टिकट
क्या कोई बेटी अपनी मौत से महज़ तीस मिनट पहले अपने घर, अपने मायके वापस लौटने के लिए ट्रेन का कन्फर्म टिकट बुक कराती है? शायद इतिहास में ऐसा कभी नहीं सुना गया होगा। लेकिन ग्रेटर नोएडा और भोपाल को हिलाकर रख देने वाले इस चर्चित ट्विशा शर्मा हत्याकांड में ठीक ऐसा ही हुआ था। 33 साल की वो होनहार, पढ़ी-लिखी, एमबीए ग्रेजुएट और पूर्व मिस पुणे, मौत को गले लगाने नहीं बल्कि अपनी माँ के पास वापस नोएडा आने की तैयारी कर रही थी। लेकिन अफ़सोस, वो ज़िंदा घर नहीं लौट पाई।
अपनी रहस्यमयी मौत से ठीक आधा घंटा पहले उसने अपनी माँ को फोन मिलाया था। वो फोन पर रो रही थी, सिसक रही थी और बेबसी में चिल्लाकर कह रही थी—”मम्मी, अब ये ज़ुल्म मुझसे बर्दाश्त नहीं होता, ये लोग मुझे पागल कर देंगे, तुम मुझे प्लीज यहाँ से निकाल कर ले जाओ।” माँ तड़प उठी, उसने तुरंत अपनी बेटी को बचाने के लिए फ्लाइट और ट्रेन के टिकट चेक किए कि किसी भी तरह भोपाल पहुँच सके। लेकिन उस बातचीत के दौरान ही कमरे में किसी की आहट होती है, ट्विशा सहमकर फोन काट देती है। और इसके ठीक आधे घंटे बाद उसी घर से दोबारा फोन आता है। फोन करने वाली ट्विशा की रिटायर्ड जिला जज सास थी, जिसने बेहद ठंडे लहजे में कहा—”शी इज नो मोर, ट्विशा मर चुकी है।”
‘I Am Trapped Bro’— आखिरी संदेश खोल रहा राज
आज इस खौफनाक वारदात को बीते कई दिन हो चुके हैं, लेकिन उस लाचार बेटी की लाश का आज तक अंतिम संस्कार नहीं हुआ है। शव मर्चुरी में पड़ा है। जानते हैं क्यों? क्योंकि उसकी शादी को महज़ पाँच महीने ही हुए थे, और आज पूरे देश की आत्मा यह सवाल पूछ रही है कि जो लड़की आधे घंटे पहले अपने मायके आने का टिकट काट रही थी, वो अचानक कैसे मर सकती है? क्या उसने खुद अपनी ज़िंदगी ख़त्म की, या फिर कानून के ठेकेदारों ने मिलकर उसका कत्ल कर दिया?
ट्विशा ने मौत से ठीक पहले अपने दोस्त को जो आखिरी संदेश भेजा था, वो इस साज़िश का सबसे डरावना सबूत है। उसने लिखा था—”आई एम ट्रैप्ड ब्रो, मैं यहाँ बुरी तरह फँस चुकी हूँ, तू कभी शादी मत करना।” ये महज़ शब्द नहीं थे, बल्कि एक ज़िंदा इंसान की आख़िरी चीख थी जो जीना चाहती थी, जो उस नर्क रूपी ससुराल से आज़ाद होना चाहती थी, लेकिन उसी घर की चारदीवारी के भीतर उसकी सांसे रोक दी गईं। आज उसका फौजी परिवार इंसाफ की भीख माँगने के लिए मुख्यमंत्री आवास के बाहर सड़कों पर बैठा है।
रक्षक बने भक्षक: कानून के रखवालों का काला सच
ट्विशा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल के समर सिंह से हुई थी। यह रिश्ता किसी लव मैरिज का नहीं, बल्कि माता-पिता की मर्जी से हुआ अरेंज मैरिज था। ससुराल का रसूख ऐसा है कि पति समर सिंह शहर का नामचीन क्रिमिनल लॉयर (आपराधिक मामलों का वकील) है, जेठ और ससुर भी कानून के बड़े माहिर हैं, और जो इस घर की मुखिया यानी ट्विशा की सास है, वो गिरिबाला सिंह हैं—जो खुद अदालत की कुर्सी पर बैठकर न्याय करने वाली रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट जज हैं। दूसरी तरफ ट्विशा का भाई भारतीय सेना में देश की सरहद की रक्षा कर रहा है। इस फौजी परिवार ने सोचा था कि जब kanoon के रखवालों के घर में अपनी बेटी दे रहे हैं, तो वो सबसे ज़्यादा सुरक्षित रहेगी।
ज़बरन अबॉर्शन और 20 लाख के शेयर्स का दबाव
ट्विशा के परिवार का सीधा आरोप है कि उसे लगातार नीचा दिखाया गया, उसके मायके को कमतर आंका गया। इतना ही नहीं, ट्विशा के पिता ने जो करीब 20 lakh रुपये के शेयर्स और इन्वेस्टमेंट अपनी बेटी के नाम किए थे, उन्हें जबरन पति समर सिंह के नाम ट्रांसफर करने का मानसिक दबाव बनाया जाने लगा।
लेकिन ज़ुल्म की हद तब पार हो गई जब ट्विशा प्रेग्नेंट हुई। आरोप है कि ससुराल वालों ने, उस जज सास और वकील पति ने मिलकर उस पर खौफनाक दबाव बनाया और बहला-फुसलाकर उसका जबरन अबॉर्शन यानी गर्भपात करवा दिया। इस घटना ने एक माँ बनने वाली बेटी को मानसिक और शारीरिक रूप से अंदर से पूरी तरह तोड़ कर रख दिया। यहाँ तक कि ट्विशा के कुछ चैट वायरल हो रहे हैं जिसमें वो बेबसी में लिख रही है कि—”मुझसे मेरा ही पति पूछ रहा है कि ये किसका बच्चा है? मैं यकीन नहीं कर पा रही कि कोई इंसान ऐसा कैसे हो सकता है।”
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उड़ाईं झूठ की धज्जियाँ
जब ट्विशा की लाश मिली, तो रसूखदार ससुराल वालों ने तुरंत एक कानूनी कहानी गढ़ी कि ट्विशा मानसिक रूप से बीमार थी, डिप्रेशन में थी और वो नशेड़ी थी, इसलिए उसने नशा करके फांसी लगा ली। लेकिन जब एम्स (AIIMS) भोपाल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई, तो उसने इन रसूखदारों के सारे झूठ के परखच्चे उड़ा दिए। रिपोर्ट में साफ़ दर्ज है कि ट्विशा के सिर पर और शरीर के कई हिस्सों पर मौत से पहले की गंभीर चोटें और किसी भारी चीज़ से वार किए जाने के गहरे निशान थे! और जो लैब रिपोर्ट आई, उसने ससुराल के ‘नशेड़ी’ वाले दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया; ट्विशा के शरीर में किसी भी तरह का नशा, ज़हर या अल्कोहल नहीं मिला।
अब यहाँ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा होता है। जिस फंदे, बेल्ट या कपड़े से फांसी लगाने का दावा ससुराल वाले कर रहे थे, वो फंदा पुलिस को क्राइम सीन पर मिला ही नहीं! आखिर वो फंदा कहाँ गायब हो गया? किसने सबूत मिटाए?
पीड़ित परिवार की साफ़ मांग: CBI जांच हो
नामी क्रिमिनल लॉयर पति समर सिंह कानून की नाक के नीचे से फरार हो गया है, जिसे पुलिस आज तक ढूंढ नहीं पाई है। और जो रिटायर्ड जिला जज सास हैं, उन्हें उम्र और रसूख के आधार पर अदालत से तुरंत अग्रिम जमानत मिल गई। यही वजह है कि इस फौजी परिवार को पुलिस की इस ढीली जांच पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है। उनकी बेहद साफ़ और जायज़ माँग है कि इस पूरे मामले की जांच दिल्ली एम्स के डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड की निगरानी में सीधे सीबीआई (CBI) को सौंपी जाए, और इस केस का ट्रायल मध्य प्रदेश से बाहर ट्रांसफर किया जाए ताकि रसूखदारों का कोई दबाव न चल सके।
UP News Network इस दुख की घड़ी में उस फौजी पिता और बिलखती माँ के साथ मुस्तैदी से खड़ा है। जब तक ट्विशा को इंसाफ नहीं मिल जाता, हम इस आवाज़ को टूटने नहीं देंगे।

