ईरान-अमेरिका तनाव के बीच पाकिस्तान में पेट्रोल हुआ सस्ता, केरोसिन महंगा; जानिए नए रेट और वैश्विक संकट का असर

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच पाकिस्तान में पेट्रोल हुआ सस्ता, केरोसिन महंगा; जानिए नए रेट और वैश्विक संकट का असर
इस्लामाबाद/नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में जारी अनिश्चितता के बीच पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में 4 रुपये प्रति लीटर की कटौती की घोषणा की है। हालांकि दूसरी ओर मिट्टी के तेल (केरोसिन) की कीमतों में 8.70 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
पाकिस्तान के पेट्रोलियम डिवीजन द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार नई कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और आयात लागत की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया है।
पेट्रोल हुआ सस्ता, डीजल में कोई बदलाव नहीं
नई दरों के अनुसार पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 381.78 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 377.78 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। इससे निजी वाहन चालकों और दोपहिया वाहन उपयोगकर्ताओं को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
वहीं हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। डीजल की कीमत 380.78 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रखी गई है। डीजल की कीमतें स्थिर रहने से माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन की लागत पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ेगा।
केरोसिन पर बढ़ा बोझ
सरकार ने मिट्टी के तेल की कीमत में 8.70 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि कर दी है। इसके बाद केरोसिन की कीमत बढ़कर 280.70 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के परिवारों को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि कई क्षेत्रों में अभी भी केरोसिन का उपयोग खाना पकाने और रोशनी के लिए किया जाता है।
क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व?
वैश्विक ऊर्जा बाजार में इस समय सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है।
दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
ईरान-अमेरिका तनाव का असर
हाल के महीनों में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव ने ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। सुरक्षा चिंताओं के कारण निवेशकों और व्यापारियों में अनिश्चितता बढ़ी है।
तेल बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और अधिक उछाल देखने को मिल सकता है। इसका असर दक्षिण एशियाई देशों समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दबाव
पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार, आयात लागत और मुद्रास्फीति जैसे मुद्दे सरकार के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
ऐसे में ईंधन की कीमतों में हर बदलाव का सीधा असर आम जनता और उद्योगों पर पड़ता है। सरकार एक ओर जनता को राहत देने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर राजकोषीय दबावों को भी संतुलित करना पड़ रहा है।
पहले भी मिली थी राहत
इससे पहले पाकिस्तान सरकार पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में बड़ी कटौती कर चुकी है। उस समय इसे आम जनता के लिए राहत पैकेज के रूप में पेश किया गया था।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार स्थिर नहीं होता, तब तक ईंधन की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
आगे क्या?
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले सप्ताहों में ईरान-अमेरिका संबंधों, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर दुनिया भर की नजर रहेगी। यदि तनाव कम होता है तो कीमतों में स्थिरता आ सकती है, लेकिन संकट बढ़ने की स्थिति में ईंधन की कीमतों पर फिर दबाव देखने को मिल सकता है।
Quick Highlights
पेट्रोल 4 रुपये प्रति लीटर सस्ता
नई कीमत: 377.78 रुपये प्रति लीटर
डीजल की कीमत में कोई बदलाव नहीं
केरोसिन 8.70 रुपये प्रति लीटर महंगा
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और ईरान-अमेरिका तनाव का असर
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव

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