लखनऊ अग्निकांड पोस्टमार्टम रिपोर्ट: बड़ा खुलासा! किसी की भी जान आग से झुलसने से नहीं गई, सभी 15 मृतकों की मौत की असल वजह आई सामने
लखनऊ अग्निकांड पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद जागा प्रशासन: बिना बिजली ऑडिट के 12 साल से चल रही थी इमारत, 4 गिरफ्तार और कोचिंग संस्थानों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में सोमवार को हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। अलीगंज सेक्टर डी स्थित एक चार मंजिला व्यावसायिक इमारत में लगी इस भीषण आग में 15 मासूम जिंदगियां हमेशा के लिए शांत हो गईं। अब इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली लखनऊ अग्निकांड पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है, जिसने डॉक्टरों और जांच अधिकारियों को भी स्तब्ध कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस हादसे में किसी भी व्यक्ति की जान आग की लपटों में झुलसने या जलने से नहीं हुई है।
दम घुटने से थमीं 15 सांसें: पोस्टमार्टम रिपोर्ट का चौंकाने वाला सच
सोमवार रात से शुरू होकर मंगलवार तड़के तक चले डॉक्टरों के पैनल के पोस्टमार्टम में यह साफ हो गया है कि सभी 15 मृतकों की मौत दम घुटने (Asphyxiation) के कारण हुई। डॉक्टरों के मुताबिक, मृतकों के शरीर पर कोई भी ऐसी गंभीर चोट या गहरे घाव के निशान नहीं मिले हैं, जिसे मौत का सीधा कारण माना जा सके। न ही शरीर के आग में जलने के कोई स्पष्ट प्रमाण मिले हैं।
हालांकि, धुएं की विभीषिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई मृतकों के चेहरे और आंखों के आसपास गंभीर सूजन पाई गई है। इसके अलावा, सभी शवों के नाक के अंदर भारी मात्रा में कालिख और धुएं के कण जमा मिले। विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी बंद जगह या बिल्डिंग में आग लगती है, तो वहां ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरता है और कार्बन मोनोऑक्साइड व हाइड्रोजन साइनाइड जैसी बेहद जहरीली गैसें भर जाती हैं। प्लास्टिक, फोम और सिंथेटिक सामानों के जलने से निकली इन गैसों ने एनीमेशन सेंटर के भीतर मौजूद युवक-युवतियों को संभलने या बाहर निकलने का मौका ही नहीं दिया और वे बेहोश होकर मौत की आगोश में समा गए।
12 साल से बिना बिजली ऑडिट के चल रहा था मौत का कारोबार
इस भीषण हादसे के पीछे की सबसे बड़ी वजह प्रशासन और भवन मालिकों की घोर लापरवाही के रूप में सामने आई है। जांच में खुलासा हुआ है कि अलीगंज सेक्टर डी की इस चार मंजिला इमारत में पिछले कई वर्षों से व्यावसायिक गतिविधियां और कोचिंग सेंटर (हैक्सार स्टूडियो) धड़ल्ले से चल रहे थे। दमकल विभाग के मानकों के अनुसार, हर तीन साल में ऐसी व्यावसायिक इमारतों का बिजली विभाग से ऑडिट कराना अनिवार्य होता है, ताकि ओवरलोडिंग और वायरिंग की कमियों का समय रहते पता लगाया जा सके।
लेकिन चंद रुपये बचाने के चक्कर में इस इमारत का कभी बिजली ऑडिट ही नहीं कराया गया। पुरानी वायरिंग पर लगातार बढ़ते लोड की वजह से सोमवार दोपहर अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ, जिसने देखते ही देखते एक भयावह त्रासदी का रूप ले लिया। फॉरेंसिक टीम ने भी घटना स्थल से शॉर्ट सर्किट से ही आग लगने के प्राथमिक साक्ष्य जुटाए हैं।
प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: 6 पर केस, 4 आरोपी जेल भेजे गए
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसआईटी (SIT) और स्थानीय पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार किया है। अलीगंज थाने में कुल छह नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ फायर सर्विस कानूनों के उल्लंघन और लापरवाही का मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार मुख्य आरोपियों—भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ला, एनीमेशन सेंटर के संचालक तुषांक कृष्ण जायसवाल, पेटशॉप मालिक रामकृष्ण उपाध्याय और नेटवर्किंग का काम देखने वाले सुरेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। मंगलवार को इन्हें कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। वहीं, फरार चल रहे दो अन्य आरोपियों, धीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। एलडीए, फायर ब्रिगेड और बिजली विभाग से तकनीकी रिपोर्ट मांगकर सभी की जवाबदेही तय की जा रही है।
हादसे में टूटी रीढ़ की हड्डी, जिंदगी की जंग लड़ रहा है इकलौता बेटा
इस दर्दनाक अग्निकांड में कई परिवारों के चिराग बुझ गए, तो कई अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। हादसे के वक्त दूसरी मंजिल पर मौजूद एनीमेशन ट्रेनर जयंत गुप्ता को जब बचने का कोई रास्ता नहीं दिखा, तो उन्होंने खिड़की से नीचे छलांग लगा दी। जयंत नीचे रखे एक जनरेटर पर गिरे, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई और हाथ झुलस गए। वर्तमान में उन्हें ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू (ICU) में रखा गया है, जहां न्यूरो सर्जरी और हड्डी रोग विशेषज्ञों की टीम उनका इलाज कर रही है। जयंत के पिता प्रदीप गुप्ता, जो पीडब्ल्यूडी से सेवानिवृत्त हैं, उन्होंने रोते हुए बताया कि घर में केवल वे और उनका इकलौता बेटा ही हैं और वे इसी साल उसकी शादी की तैयारियां कर रहे थे। वहीं दूसरी ओर, दिल्ली की रहने वाली लवप्रीत कौर को मामूली चोटें आई हैं, जिनकी स्थिति अब स्थिर है।
जागे ज़िम्मेदार: कोचिंग और स्कूलों की जांच के लिए टीमें गठित
इस बड़े हादसे के बाद अब उत्तर प्रदेश का शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में चल रहे कोचिंग संस्थानों की जांच के लिए चार विशेष टीमें गठित की हैं। ये टीमें उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अधिनियम, 2002 और केंद्र सरकार की गाइडलाइंस 2024 के मानकों के आधार पर हर संस्थान को परखेंगी। जिन कोचिंग सेंटरों के मानक पूरे नहीं होंगे, उनका पंजीकरण तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा।
इसके साथ ही, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग ने भी कड़ा रुख अपनाया है। लखनऊ सहित सीतापुर, लखीमपुर, हरदोई, रायबरेली और उन्नाव के जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि 1 जुलाई को स्कूल खुलने से पहले सभी निजी व सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था और फायर ब्रिगेड की एनओसी (NOC) की सघन जांच की जाए। मानकों में लापरवाही बरतने वाले स्कूलों की मान्यता तक रद्द करने की चेतावनी दी गई है।

