Bharat Tiwari Encounter Case पर बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा बयान, पूछा- अगर ऐसे ही होना है तो फिर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की जरूरत क्या है?
Bharat Tiwari Encounter Case को लेकर यूपी के बाहुबली नेता ने एनकाउंटर की नई परंपरा पर जताई गहरी चिंता; न्यायिक प्रक्रिया और निष्पक्ष जांच का उठाया मुद्दा।
Bharat Tiwari Encounter Case इस समय न केवल उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति के केंद्र में आ गया है, बल्कि इसने देश के प्रशासनिक और न्यायिक ढांचे पर भी एक बहुत बड़ी बहस छेड़ दी है। इस पूरे संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर, बेबाक और बाहुबली नेता बृजभूषण शरण सिंह ने एक ऐसा विस्फोटक बयान दिया है, जिसने सत्ता के गलियारों से लेकर पुलिस महकमे तक भारी खलबली पैदा कर दी है। मीडियाकर्मियों से खुलकर बातचीत करते हुए पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने हालिया दिनों में हुई इस मुठभेड़ की पूरी कार्रवाई को सीधे कठघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में कहा कि किसी भी व्यक्ति को न्यायिक प्रक्रिया, अदालत या कानून के कटघरे में खड़ा किए बिना, पहले ही उसे पूरी तरह दोषी मान लेना और उसका फैसला ऑन-द-स्पॉट कर देना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए पूरी तरह अनुचित और खतरनाक है। उन्होंने इस बात पर सबसे ज्यादा ज़ोर दिया कि भारत एक लोकतांत्रिक और संवैधानिक देश है, जहाँ हर एक नागरिक को चाहे वह कोई भी हो, भारत के संविधान के तहत न्याय पाने का पूरा और अटूट अधिकार दिया गया है।
इस मामले में आगे बात करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने एनकाउंटर की इस बढ़ती हुई नई संस्कृति और शॉर्टकट न्याय की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता और निराशा व्यक्त की। उन्होंने सीधे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर तीखे और असहज करने वाले सवाल दागते हुए कहा कि आज देश में एक बेहद अजीब और डराने वाली नई परंपरा शुरू होती दिखाई दे रही है। इस नई परंपरा के तहत किसी भी आपराधिक या संदेहास्पद मामले में, केवल आरोपित व्यक्तियों का कानून को ताक पर रखकर सीधे एनकाउंटर कर दिया जाता है। उन्होंने व्यवस्था को घेरते हुए एक बहुत बड़ा सवाल उठाया और पूछा कि यदि देश में इसी तरह से बिना सुनवाई के पुलिस और प्रशासन को ही सीधे फैसले करने हैं, यदि सड़कों पर ही सरेआम इंसाफ का तराजू तौलना है, तो फिर इस लोकतांत्रिक देश में हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और पूरे विशाल न्यायिक तंत्र की क्या आवश्यकता रह जाएगी? अदालतों, जजों और वकीलों की उपयोगिता पर सवाल उठाने वाला उनका यह बयान इस समय सोशल मीडिया की सुर्खियों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक एक बड़ी आग की तरह फैल चुका है।
अपने इस बेबाक बयान को आगे बढ़ाते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता ने भारतीय संविधान और लोकतंत्र की मूल मर्यादाओं का विस्तार से हवाला दिया। उन्होंने कहा कि भारत का पवित्र संविधान देश के हर छोटे-बड़े नागरिक को यह कानूनी और नैतिक भरोसा देता है कि उसके खिलाफ लगे आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच व सुनवाई होगी। किसी भी पेचीदा, आपराधिक या विवादित मामले में दोषी को सजा देने का या अंतिम निर्णय लेने का कानूनी अधिकार केवल और केवल देश की मान्य अदालतों के पास ही सुरक्षित होना चाहिए, न कि किसी प्रशासनिक या पुलिस अधिकारी की पिस्तौल की नोक पर। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेताया कि कानून के शासन (Rule of Law) वाले इस देश में किसी भी आरोपी के मामले की गहनता से पुलिस जांच, अदालत के भीतर उसकी दलीलें और गवाहियाँ सुनना, और पूरी स्थापित न्यायिक प्रक्रिया का अक्षरशः पालन होना बेहद जरूरी है। बिना किसी ठोस कानूनी और अदालती प्रक्रिया के इस प्रकार से किए जाने वाले त्वरित फैसले हमारे महान देश के संवैधानिक ढांचे को अंदर से खोखला और कमजोर करते हैं।
Bharat Tiwari Encounter Case की संवेदनशीलता को देखते हुए बृजभूषण शरण सिंह यहीं नहीं रुके, उन्होंने पूरी निष्पक्षता के साथ इस एनकाउंटर की टाइमिंग और तरीके पर भी बात की। उन्होंने पुरज़ोर मांग उठाई कि इस पूरे मामले की बैकग्राउंड से लेकर अंत तक गहराई से और पूरी तरह से एक उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि जो भी पर्दे के पीछे की सच्चाई है, वह दूध का दूध और पानी का पानी होकर पूरी दुनिया के सामने आ सके। उन्होंने देश के नीति निर्माताओं और जनता को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी समाज में न्याय तभी जीवित रह सकता है जब हम पूरी तरह से कानून के दायरे में रहकर और अपनी सीमाओं को पहचानकर कोई कार्रवाई करेंगे। कानून को अपने हाथ में लेना या त्वरित लोकप्रियता हासिल करने के लिए कानूनी सीमाओं को लांघकर इस तरह का त्वरित न्याय (Instant Justice) करने की कोशिश करना सभ्य समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए बिल्कुल भी सही संदेश नहीं है।
गौरतलब है कि सत्ता पक्ष से जुड़े इतने बड़े और रसूखदार भाजपा नेता के इस विस्फोटक बयान के बाद यह एनकाउंटर का मामला अब एक बेहद गंभीर राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। उत्तर प्रदेश और बिहार समेत देश के विभिन्न प्रमुख विपक्षी दलों, मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा भी इस एनकाउंटर की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग लगातार और अधिक आक्रामक तरीके से उठाई जा रही है। इस बीच, राजनीतिक विश्लेषकों और कानूनविदों का भी यही मानना है कि सत्ताधारी दल के ही एक इतने वरिष्ठ नेता द्वारा अपनी ही व्यवस्था, सरकार और पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई पर इस तरह सरेआम और बेबाकी से सवाल उठाना, आने वाले दिनों में सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ और एनकाउंटर की नीतियों को लेकर एक नई और लंबी कानूनी बहस को जन्म देगा। फिलहाल, ग्राउंड ज़ीरो पर जनता का आक्रोश, पीड़ित परिवार की मांग और बृजभूषण शरण सिंह का यह तीखा बयान पूरी तरह से प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया की सबसे बड़ी हेडलाइन बना हुआ है।

