भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: अमित शाह से मिले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान; मीडिया से बोले—’आत्मसमर्पण के बाद भी मारना कतई उचित नहीं’
भरत तिवारी एनकाउंटर मामला अब दिल्ली पहुंचा, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर उठाए गंभीर सवाल, UP News Network पर पूरी रिपोर्ट।
नई दिल्ली/पटना:
भरत तिवारी एनकाउंटर मामला अब बिहार की सीमाओं को पार कर देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच चुका है और राजनीतिक गलियारों में इस पर हलचल तेज हो गई है। इस पूरे प्रकरण में आज उस समय एक बड़ा मोड़ सामने आया, जब केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने देश के गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान चिराग पासवान ने इस कथित एनकाउंटर से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों को लेकर गृह मंत्री के सामने अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
मुलाकात करने के ठीक बाद जब चिराग पासवान मीडिया के कैमरों के सामने आए, तो उनके तेवर बेहद सख्त थे। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के प्रशासन की थ्योरी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “अधिकारियों और प्रशासन की यह कार्रवाई पूरी तरह जांच के दायरे में आनी चाहिए। जब भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण (Surrender) कर दिया था, तो आत्मसमर्पण करने के बाद भी उसे मार दिया गया। कानून व्यवस्था के नाम पर इस तरह की कार्रवाई कतई उचित नहीं है।” चिराग पासवान के इस बयान ने बिहार से लेकर दिल्ली तक के सियासी हलकों में हड़कंप मचा दिया है।
क्या है पूरा मामला और क्यों उठ रहे हैं सवाल?
गौरतलब है कि भाई भरत तिवारी अपने क्षेत्र में एक ऐसी शख्सियत के रूप में जाने जाते थे जो भ्रष्ट व्यवस्था, प्रशासनिक ढुलमुल रवैए और सिस्टम की तानाशाही के खिलाफ हमेशा मुखर होकर खड़े रहते थे। आम जनता के रुके हुए काम करवाना, अधिकारियों की लापरवाही के खिलाफ जनता की अदालत लगाना और गरीबों को उनका हक दिलाना उनकी पहचान बन चुका था। यही कारण था कि उनके आवास पर हमेशा समर्थकों का भारी जनसैलाब और गाड़ियों का लंबा काफिला देखने को मिलता था।
जनता के बीच उनकी बढ़ती लोकप्रियता और सिस्टम को चुनौती देने वाले उनके अंदाज के कारण वे स्थानीय प्रशासन की आंखों में खटकने लगे थे। इसके बाद पुलिस और प्रशासन द्वारा एक कथित एनकाउंटर में उन्हें मार गिराया गया। लेकिन शुरुआत से ही परिवार, क्षेत्र के नागरिकों और उनके समर्थकों का यह आरोप है कि यह कोई वास्तविक मुठभेड़ नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और ‘फर्जी एनकाउंटर’ है। समर्थकों का दावा है कि भरत तिवारी कानून का सम्मान करते हुए सरेंडर करने को तैयार थे और उन्होंने आत्मसमर्पण कर भी दिया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें रास्ते से हटाने के लिए इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया।
चिराग पासवान की एंट्री से बैकफुट पर प्रशासन!
एनडीए (NDA) के एक महत्वपूर्ण सहयोगी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान द्वारा इस मुद्दे को सीधे देश के गृह मंत्री अमित शाह के सामने उठाए जाने के बाद अब बिहार शासन और पुलिस प्रशासन पर दबाव बेहद बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिराग पासवान का यह कदम यह साफ करता है कि इस मामले को केवल एक अपराधी के खात्मे के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसके पीछे की सच्चाई कुछ और है।
media से बातचीत के दौरान चिराग पासवान ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक देश में किसी को भी कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। यदि किसी ने आत्मसमर्पण कर दिया है, तो न्याय प्रक्रिया के तहत कोर्ट को फैसला करना चाहिए, न कि पुलिस को खुद जज बनकर एनकाउंटर कर देना चाहिए। उन्होंने गृह मंत्री से इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने का अनुरोध किया है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
शहादत को इंसाफ दिलाने की मांग हुई तेज
भरत तिवारी के निधन के बाद से ही उनके क्षेत्र में जनता का आक्रोश सातवें आसमान पर है। लोग इसे एक ‘क्रांतिकारी की शहादत’ के रूप में देख रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक “शहीद भाई भरत तिवारी अमर रहें” और “जस्टिस फॉर भरत तिवारी” के नारे गूंज रहे हैं। चिराग पासवान के इस बड़े बयान ने अब पीड़ित परिवार और समर्थकों की इंसाफ की लड़ाई को एक नई और मजबूत राजनीतिक ताकत दे दी है।
अब देखना यह होगा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय इस बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले में क्या रुख अपनाता है और बिहार सरकार इस कथित फर्जी एनकाउंटर के आरोपों पर क्या कदम उठाती है। लेकिन एक बात साफ है कि चिराग पासवान के इस बयान ने इस पूरे मामले को देश के सबसे बड़े राजनीतिक मुद्दों में से एक बना दिया है।

