छात्र मर रहे हैं, मंत्री कुर्सी बचा रहे हैं… जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का शक्ति प्रदर्शन
6 जून 2026, नई दिल्लीदेशभर में शिक्षा व्यवस्था की खामियों, NEET पेपर लीक और लगातार हो रही छात्र आत्महत्याओं ने एक बार फिर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। 6 जून 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया।CJP क्या है और अभिजीत दीपके कौन हैं?कॉकरोच जनता पार्टी एक व्यंग्यात्मक युवा आंदोलन है जो मई 2026 में शुरू हुआ। अभिजीत दीपके, जो अमेरिका में पब्लिक रिलेशंस पढ़ रहे हैं, ने सुप्रीम कोर्ट के एक जज की “कॉकरोच” वाली टिप्पणी के बाद इस पार्टी की नींव रखी। शुरू में मजाक के तौर पर शुरू हुई यह मुहिम तेजी से वायरल हुई और लाखों युवाओं को जोड़ लिया।अभिजीत दीपके आज दिल्ली एयरपोर्ट से सीधे जंतर-मंतर पहुंचे और छात्रों व युवाओं के साथ प्रदर्शन किया।शिक्षा मंत्री पर गंभीर आरोपअभिजीत दीपके ने तीखे शब्दों में कहा: “छात्र मर रहे हैं और मंत्री कुर्सी बचा रहे हैं। जब लगातार छात्र अपनी जान गंवा रहे हैं, तो केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा।”
CJP का आरोप है कि NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले के बाद कम से कम 5 छात्रों ने आत्महत्या कर ली। दीपके ने शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेने और इस्तीफा देने की मांग की है।छात्र आत्महत्याओं का बढ़ता संकट – आंकड़े और हकीकतNCRB के ताजा आंकड़ों के अनुसार:2024 में 14,488 छात्रों ने आत्महत्या की (पिछले 10 सालों में 64.9% की बढ़ोतरी)।
NEET, JEE, UPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं का अत्यधिक दबाव, कोचिंग सेंटरों का व्यापार, परिवारों की उम्मीदें और काउंसलिंग की कमी इस संकट की मुख्य वजहें हैं।
2026 के NEET पेपर लीक मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया। 23 लाख से ज्यादा छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ, जिसके बाद कई युवा हताशा में आत्महत्या की राह पर चले गए।CJP की मुख्य मांगेंशिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
सभी छात्र आत्महत्याओं की निष्पक्ष CBI जांच
दोषियों पर सख्त कार्रवाई
हर शिक्षण संस्थान में अनिवार्य मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग सेंटर
परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुधार (NTA सुधार)
राजनीतिक प्रतिक्रियाएंविपक्षी दलों (कांग्रेस, NSUI, AISF आदि) ने भी इस मुद्दे को उठाया है। कई छात्र संगठन जंतर-मंतर पर पहुंचे। वहीं सरकार का कहना है कि पेपर लीक की जांच चल रही है और दोषियों पर कार्रवाई होगी।हमारा विश्लेषणशिक्षा मंत्री का इस्तीफा एक प्रतीकात्मक कदम हो सकता है, लेकिन असली समस्या गहरी है। हमारी शिक्षा प्रणाली रट्टा मारने और रैंक पर आधारित है, न कि स्किल और मेंटल हेल्थ पर।जरूरी सुधार क्या होने चाहिए?स्कूल-कॉलेज स्तर पर फुल-टाइम काउंसलर रखना
परीक्षाओं को कम तनावपूर्ण और प्रैक्टिकल ओरिएंटेड बनाना
कोचिंग इंडस्ट्री पर सख्त रेगुलेशन
छात्रों के लिए ज्यादा स्कॉलरशिप और सपोर्ट सिस्टम
अभिभावकों को जागरूक करना कि बच्चे का जीवन रैंक से ज्यादा कीमती है
CJP जैसे युवा आंदोलन इस बात का संकेत हैं कि आज का Gen-Z अब चुप नहीं रहेगा।निष्कर्षजंतर-मंतर पर आज जो प्रदर्शन हुआ, वह सिर्फ एक मंत्री के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के खिलाफ है। अगर सरकार ने समय रहते गंभीर कदम नहीं उठाए तो यह आग और फैलेगी।छात्रों से अपील: अपनी आवाज उठाओ, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से।
सरकार से अपील: छात्रों की जान बचाना आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि कुर्सी बचाना।
हमारा विश्लेषणशिक्षा मंत्री का इस्तीफा एक प्रतीकात्मक कदम जरूर हो सकता है, लेकिन असली समस्या शिक्षा व्यवस्था की जड़ों में है। हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली मुख्य रूप से रट्टा मारने, अंकों और रैंकिंग पर आधारित है। इससे छात्रों पर जबरदस्त मानसिक दबाव पड़ता है। स्किल डेवलपमेंट, क्रिएटिविटी और मेंटल हेल्थ को लगभग नजरअंदाज किया जा रहा है।शिक्षा व्यवस्था में क्या बड़े सुधार होने चाहिए?हर स्कूल और कॉलेज में फुल-टाइम मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य की जाए।
परीक्षा प्रणाली को कम तनावपूर्ण और प्रैक्टिकल ओरिएंटेड बनाया जाए।
कोचिंग इंडस्ट्री पर सख्त नियंत्रण और रेगुलेशन लगाया जाए।
छात्रों के लिए ज्यादा स्कॉलरशिप और सपोर्ट सिस्टम विकसित किए जाएं।
अभिभावकों को जागरूक किया जाए कि बच्चे का जीवन किसी रैंक या नंबर से कहीं ज्यादा कीमती है।
CJP जैसे युवा आंदोलन इस बात का स्पष्ट संकेत देते हैं कि आज का Gen-Z चुप रहने वाला नहीं है। वे सिर्फ अपनी मांगों को लेकर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में बदलाव चाहते हैं।निष्कर्षजंतर-मंतर पर आज जो शक्ति प्रदर्शन हुआ, वह सिर्फ एक मंत्री के खिलाफ नहीं बल्कि पूरी दोषपूर्ण शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ है। अगर सरकार समय रहते इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार नहीं करती और ठोस कदम नहीं उठाती, तो यह नाराजगी और बढ़ेगी।छात्रों से अपील: अपनी आवाज जरूर उठाएं, लेकिन हमेशा शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से। हिंसा कभी कोई समाधान नहीं होती।सरकार से अपील: छात्रों की जान बचाना आपकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि कुर्सी बचाना। शिक्षा सुधार अब टालने का विषय नहीं रह गया है।देश के भविष्य यानी छात्रों की सुरक्षा और उनके मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करना हर जिम्मेदार नागरिक और सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। आशा है कि इस प्रदर्शन के बाद सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।





