लखनऊ एनिमेशन सेंटर अग्निकांड: अलीगंज में भीषण आग से 14 छात्रों की मौत, सुरक्षा इंतजामों पर उठे गंभीर सवाल
लखनऊ एनिमेशन सेंटर अग्निकांड में धुएं और भगदड़ के बीच कई छात्रों ने बचने के लिए ऊंचाई से लगाई छलांग, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जताया शोक; केंद्र सरकार ने मुआवजे का किया एलान।
लखनऊ एनिमेशन सेंटर अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र स्थित पुरनिया इलाके में सोमवार, 22 जून 2026 को एक एनिमेशन और कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र में लगी भीषण आग ने 14 परिवारों के सपनों को हमेशा के लिए छीन लिया। हादसे में अब तक 14 छात्रों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि कई अन्य छात्र घायल हुए हैं। यह दर्दनाक घटना न केवल प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है, बल्कि निजी शिक्षण संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करती है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसा सोमवार दोपहर उस समय हुआ जब एनिमेशन सेंटर में बड़ी संख्या में छात्र कक्षाओं में मौजूद थे। अचानक इमारत के भीतर आग लगने के बाद कुछ ही मिनटों में पूरा भवन घने धुएं से भर गया। धुएं के कारण छात्रों में अफरा-तफरी मच गई और बाहर निकलने के रास्ते अवरुद्ध होने लगे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई छात्रों ने जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से छलांग लगा दी। स्थानीय निवासी अमन ने बताया कि उन्होंने और आसपास के लोगों ने मिलकर 5 से 6 छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला। उन्होंने बताया कि जब वे मौके पर पहुंचे तो इमारत से घना धुआं निकल रहा था और अंदर फंसे छात्रों की चीख-पुकार सुनाई दे रही थी।
घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचाव दल ने आसपास की इमारतों की छतों से सेंटर की दीवार तोड़कर अंदर फंसे छात्रों को निकालने का प्रयास किया। राहत और बचाव अभियान कई घंटों तक जारी रहा।
इस हादसे पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी आंखों से 14 शव देखे हैं। हालांकि, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के प्रवक्ता डॉ. के.के. सिंह के अनुसार, अस्पताल में 13 लोगों को मृत घोषित किया गया है, जबकि पांच अन्य घायलों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सभी निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए और तत्काल लखनऊ रवाना हो गए। मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक और अपर मुख्य सचिव (गृह) को घटनास्थल पर पहुंचकर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा, “लखनऊ में हुई अग्नि दुर्घटना अत्यंत दुःखद और हृदय विदारक है। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिवारों के साथ हैं। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इस हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि लखनऊ में हुई अग्नि दुर्घटना में अनेक लोगों की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। केंद्र सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। साथ ही घायलों के उपचार के लिए हरसंभव मदद उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि इस हादसे के पीछे के कारणों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या संबंधित एनिमेशन सेंटर के पास वैध फायर एनओसी थी? क्या भवन में पर्याप्त आपातकालीन निकास द्वार मौजूद थे? क्या अग्निशमन उपकरण कार्यशील स्थिति में थे? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या संस्थान में समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट कराया जाता था?
विशेषज्ञों का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी अक्सर बड़े हादसों का कारण बनती है। कई निजी प्रशिक्षण केंद्र सीमित स्थान में बड़ी संख्या में छात्रों को बैठाकर संचालन करते हैं, जबकि सुरक्षा नियमों का पालन केवल कागजों तक सीमित रहता है।
प्रशासन ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक जांच में भवन निर्माण मानकों, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन की जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों और संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लखनऊ एनिमेशन सेंटर अग्निकांड ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम अपने बच्चों को सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण दे पा रहे हैं? यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की संभावित अनदेखी का परिणाम भी हो सकती है।
आज जरूरत इस बात की है कि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन सभी निजी शिक्षण संस्थानों, कोचिंग सेंटरों और प्रशिक्षण संस्थानों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराएं। साथ ही, अग्नि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल, पूरे देश की संवेदनाएं उन परिवारों के साथ हैं जिन्होंने इस दर्दनाक हादसे में अपने बच्चों को खो दिया। यह त्रासदी लंबे समय तक लोगों के दिलों में एक गहरे घाव के रूप में याद रखी जाएगी।

