🚨 जीएसटी विभाग की बैठक में मचा हड़कंप!
डिप्टी कमिश्नर को आया हार्ट अटैक, एडिशनल कमिश्नर पर अभद्रता के गंभीर आरोप
UP NEWS NETWORK | विशेष संवाददाता
ग्रेटर नोएडा | 13 जून 2026 | शनिवार
ग्रेटर नोएडा स्थित राज्य कर (GST) विभाग के कार्यालय में शुक्रवार को हुई एक समीक्षा बैठक उस समय विवादों के केंद्र में आ गई जब बैठक के दौरान डिप्टी कमिश्नर (GST) वेद प्रकाश सिंह की अचानक तबीयत बिगड़ गई और उन्हें हार्ट अटैक आने के बाद तत्काल अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस घटना के बाद विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भारी चिंता का माहौल है। वहीं घटना को लेकर कई गंभीर आरोप भी सामने आए हैं, जिनमें बैठक के दौरान कथित अभद्र व्यवहार और मानसिक दबाव की बातें शामिल हैं।
मामला गौतमबुद्ध नगर जोन के सेक्टर-148 स्थित राज्य कर विभाग कार्यालय का है। विभागीय सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को अधिकारियों की एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें विभिन्न लंबित मामलों और विभागीय कार्यों की समीक्षा की जा रही थी। इसी दौरान डिप्टी कमिश्नर वेद प्रकाश सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कार्यों की प्रगति को लेकर चर्चा हुई। बैठक में मौजूद कुछ अधिकारियों का दावा है कि चर्चा के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया था।
सूत्रों के अनुसार वेद प्रकाश सिंह ने बैठक में अपनी बात रखते हुए कहा कि पिछले कई दिनों से विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियों का बोझ है। बताया गया कि हाल ही में पुलिस भर्ती प्रक्रिया में भी कई अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। इसके अलावा जनगणना और अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी विभागीय स्टाफ की तैनाती की गई थी। ऐसे में नियमित विभागीय कार्यों को समय पर पूरा करने में कठिनाइयां आ रही थीं।
बैठक में मौजूद अधिकारियों के अनुसार वेद प्रकाश सिंह ने कथित रूप से हाथ जोड़कर कुछ समय देने का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि विभाग का स्टाफ लगातार दिन-रात काम कर रहा है और थोड़े अतिरिक्त समय में सभी लंबित कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। हालांकि आरोप है कि उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया और बैठक के दौरान उन पर लगातार दबाव बनाया गया।
कुछ अधिकारियों का दावा है कि बातचीत के दौरान स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि वेद प्रकाश सिंह भावनात्मक रूप से प्रभावित हो गए। आरोप है कि इसी दौरान उनके साथ कठोर भाषा का प्रयोग किया गया और उनके भविष्य तथा पदोन्नति को लेकर भी टिप्पणियां की गईं। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बैठक के दौरान अचानक वेद प्रकाश सिंह की तबीयत बिगड़ने लगी। कुछ ही देर बाद वे बेहोश होकर गिर पड़े। घटना के बाद बैठक कक्ष में अफरा-तफरी मच गई। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने तुरंत उन्हें प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई और अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल आईसीयू में भर्ती किया।
सूत्रों के अनुसार घटना की जानकारी मिलते ही उनके परिवार को सूचना दी गई। बताया गया कि उनके परिजन वाराणसी से ग्रेटर नोएडा के लिए रवाना हुए। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी अस्पताल पहुंचकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली।
इस घटना के बाद विभाग के भीतर कार्यस्थल के माहौल को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि विभाग में लंबे समय से तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। उनका कहना है कि समीक्षा बैठकों के दौरान कई बार अधिकारियों को अत्यधिक दबाव का सामना करना पड़ता है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर मामले में आरोपों के घेरे में आए अपर आयुक्त (एडिशनल कमिश्नर) संदीप भागिया ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि बैठक पूरी तरह विभागीय समीक्षा के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। उनके अनुसार समीक्षा के दौरान कुछ सवाल पूछे गए, जिनका जवाब देते समय डिप्टी कमिश्नर को असहजता महसूस होने लगी। उन्होंने कहा कि स्थिति को शांत करने का प्रयास किया गया था लेकिन बाद में स्वास्थ्य संबंधी समस्या उत्पन्न होने पर उन्हें अस्पताल भेजा गया।
संदीप भागिया ने यह भी कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार वेद प्रकाश सिंह की स्थिति अब पहले से बेहतर है और चिकित्सकीय निगरानी में उनका उपचार जारी है। उन्होंने किसी भी प्रकार की अभद्रता या अनुचित व्यवहार के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
घटना के बाद प्रशासनिक महकमे में भी इस प्रकरण को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कई कर्मचारी संगठनों और विभागीय अधिकारियों का मानना है कि सरकारी अधिकारियों पर लगातार बढ़ते कार्यभार और मानसिक दबाव को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि प्रशासनिक दक्षता और कार्य निष्पादन जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण अधिकारियों और कर्मचारियों का मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य भी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च दबाव वाले प्रशासनिक पदों पर कार्यरत अधिकारियों को अक्सर लंबे समय तक तनावपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। यदि समय रहते तनाव प्रबंधन और स्वास्थ्य सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जाए तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
फिलहाल पूरा मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। विभागीय कर्मचारियों की नजर अब वेद प्रकाश सिंह के स्वास्थ्य पर टिकी हुई है, जबकि दूसरी ओर बैठक के दौरान लगाए गए आरोपों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में यदि इस मामले की कोई विभागीय जांच होती है तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
ग्रेटर नोएडा के प्रशासनिक और कर विभाग से जुड़े इस घटनाक्रम ने सरकारी कार्यालयों में कार्य संस्कृति, मानसिक दबाव और अधिकारियों के स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल सभी की यही कामना है कि डिप्टी कमिश्नर वेद प्रकाश सिंह जल्द स्वस्थ होकर अपने दायित्वों पर लौटें।

