Bharat Bhushan Tiwari Encounter Case पर बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद का बड़ा बयान; कहा- यह एनकाउंटर नहीं, सरासर मर्डर है, दोषियों को फांसी होनी चाहिए!
Bharat Bhushan Tiwari Encounter Case को लेकर पूर्व DGP अभयानंद ने पुलिस की थ्योरी को नकारा; कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और साइबर फॉरेंसिक जांच के जरिए आदेश देने वाले बड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की उठाई मांग।
Bharat Bhushan Tiwari Encounter Case इस समय बिहार और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक महकमे तक सबसे बड़ा और गरमाता हुआ मुद्दा बन चुका है। बिहार के भोजपुर जिले के चर्चित इस पूरे मामले ने अब एक बेहद गंभीर और नया मोड़ ले लिया है, क्योंकि सूबे के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) अभयानंद ने पुलिस की इस पूरी मुठभेड़ की थ्योरी पर बेहद तीखे और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व डीजीपी अभयानंद ने मीडिया से बातचीत के दौरान पूरे मामले का बारीकी से विश्लेषण किया और कहा कि जो वीडियो और दृश्य सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आए हैं, उन्हें देखकर यह मामला दूर-दूर तक कोई पुलिस एनकाउंटर नहीं लगता। उन्होंने स्पष्ट और कड़े शब्दों में कहा कि यह पुलिस मुठभेड़ नहीं बल्कि सरासर हत्या (मर्डर) का मामला प्रतीत होता है और इस प्रकार के कृत्यों को किसी भी हाल में जायज नहीं ठहराया जा सकता।
इस मामले पर अपने विचार साझा करते हुए पूर्व डीजीपी अभयानंद ने पुलिसिया भाषा और प्रशासनिक दावों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि आजकल ‘एनकाउंटर’ शब्द का बहुत ही गलत और भ्रामक इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके मुताबिक, अगर तथ्यों और दृश्यों के आधार पर किसी व्यक्ति की सुनियोजित तरीके से हत्या की गई है और कानूनी जांच में इसके पर्याप्त सबूत सामने आ जाते हैं, तो फिर इसमें शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सीधे तौर पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि देश के कानून में हत्या के जघन्य मामलों के लिए आजीवन कारावास या फांसी जैसी कड़ी से कड़ी सजा का स्पष्ट प्रावधान है, और इस मामले में भी अपराधियों के साथ वैसा ही सलूक होना चाहिए।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए पूर्व पुलिस महानिदेशक ने जांच के तरीकों को लेकर कई महत्वपूर्ण तकनीकी सुझाव दिए और गहरी मांग उठाई। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस पूरे हत्याकांड की पूरी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी बेहद आवश्यक है। इस जांच का दायरा केवल उन पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं होना चाहिए जिन्होंने मौके पर बंदूकें तानीं या सीधे तौर पर गोली चलाई, बल्कि उन वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी सघन जांच की जानी चाहिए जिन्होंने पर्दे के पीछे से इस प्रकार की अवैध कार्रवाई के आदेश दिए थे। अभयानंद ने इस बात की जरूरत बताई कि यदि मामले की तह तक पहुंचना है और असली साजिशकर्ताओं को बेनकाब करना है, तो पूरी घटना से जुड़े कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की गहनता से जांच की जाए और साइबर फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद से पूरे घटनाक्रम की वैज्ञानिक कड़ियों को आपस में जोड़ा जाए।
Bharat Bhushan Tiwari Encounter Case की पूरी पृष्ठभूमि की बात करें तो यह दर्दनाक घटना बीती 17 जून को भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में पुलिस की एक कथित कार्रवाई के दौरान घटित हुई थी, जहां गोली लगने से भरत भूषण तिवारी की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से ही स्थानीय पुलिस का यह लगातार दावा रहा है कि अपराधियों ने पुलिस टीम पर हमला किया था, जिसके बाद पुलिस ने पूरी तरह से आत्मरक्षा (Self-Defense) में गोलियां चलाईं। इसके बिल्कुल उलट, मृतक भरत भूषण तिवारी के परिजनों और चश्मदीदों का यह सीधा और बेहद संगीन आरोप है कि भरत तिवारी पुलिस के सामने पूरी तरह से आत्मसमर्पण (Surrender) करने के लिए तैयार थे, लेकिन इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें कोई मौका दिए बिना बेहद करीब से गोली मार दी। इस पूरी घटना का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद से ही यह पूरा मामला एक बड़े राजनीतिक और कानूनी संग्राम का रूप ले चुका है।
हालाँकि, बढ़ते जन-आक्रोश और चौतरफा दबाव को देखते हुए प्रशासन की तरफ से इस पूरे मामले के उच्च स्तरीय जांच के आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं, और शुरुआती जांच के आधार पर कई दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन और दंडात्मक कार्रवाई भी की गई है। परंतु, पूर्व डीजीपी अभयानंद के इस नए और विस्फोटक बयान ने इस लड़ाई को अब एक बिल्कुल अलग धरातल पर लाकर खड़ा कर दिया है। एक पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी द्वारा सीधे अपनी ही पूर्ववर्ती संस्था की कार्रवाई को ‘मर्डर’ करार देना यह साबित करता है कि दाल में कुछ न कुछ काला जरूर है।
इस समय पूरे क्षेत्र की जनता और विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठन पीड़ित परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और ग्राउंड ज़ीरो से लेकर सोशल मीडिया तक न्याय की मांग लगातार तेज होती जा रही है। विपक्षी पार्टियों ने भी इस बयान को लपकते हुए सरकार की कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल दाग दिए हैं। ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में फॉरेंसिक रिपोर्ट और उच्च स्तरीय जांच के परिणाम क्या सामने आते हैं और क्या वास्तव में उन बड़े चेहरों तक कानून के हाथ पहुंच पाते हैं, जिन्होंने इस कथित एनकाउंटर की पटकथा लिखी थी। फिलहाल, ‘UP News Network’ की टीम इस पूरे मामले के हर एक पहलू पर पैनी नजर बनाए हुए है।
