छत्तीसगढ़ में इजराइल नर्स भर्ती पर सनसनी! राजभवन ने मांगी रिपोर्ट: गृह-आधारित केयरगिवर भर्ती विवादों के घेरे में, राज्यपाल ने स्वास्थ्य विभाग से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ में इजराइल नर्स भर्ती के तहत जीएनएम और बीएससी नर्सिंग पास युवाओं को घरेलू कामों में धकेले जाने का संगीन आरोप; डॉक्टरों और नर्सिंग एसोसिएशन ने पेशे की गरिमा और सुरक्षा को लेकर खड़े किए तीखे सवाल
छत्तीसगढ़ में इजराइल नर्स भर्ती के तहत जीएनएम और बीएससी नर्सिंग पास युवाओं को घरेलू कामों में धकेले जाने का संगीन आरोप; डॉक्टरों और नर्सिंग एसोसिएशन ने पेशे की गरिमा और सुरक्षा को लेकर खड़े किए तीखे सवाल
छत्तीसगढ़ में इजराइल नर्स भर्ती पर मचे इस घमासान के बीच राजभवन ने कड़ा संज्ञान लिया है। भारत-इजराइल लेबर मोबिलिटी एग्रीमेंट के तहत राज्य के नर्सिंग स्नातकों (GNM और BSc Nursing) को इजराइल भेजने की जो मुहिम बड़े स्तर पर शुरू हुई थी, वह अब गंभीर प्रशासनिक और नैतिक विवादों के घेरे में आ चुकी है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस मेडिकल सेल के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता की लिखित शिकायत और नर्सिंग बिरादरी के भारी आक्रोश के बाद, महामहिम राज्यपाल के सचिवालय (राजभवन) ने इस पूरे मामले पर कड़ा एक्शन लिया है। राजभवन ने इस संवेदनशील भर्ती प्रक्रिया में नियमों की कथित अनदेखी और नर्सों के मानवाधिकारों व पेशे की गरिमा के हनन की शिकायतों को देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग को एक उच्च स्तरीय और विस्तृत जांच सौंप दी है, जिसके बाद मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर को जल्द से जल्द विस्तृत रिपोर्ट जमा करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
📋 क्या है पूरा भर्ती मामला और विवाद की असली जड़?
इस पूरे विवाद की शुरुआत 11 जून को तब हुई, जब छत्तीसगढ़ नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने केंद्र सरकार के स्किल डेवलपमेंट मंत्रालय (MSDE) के निर्देशों का हवाला देते हुए एक सर्कुलर जारी किया। इस सर्कुलर के जरिए राज्य के सरकारी और निजी नर्सिंग कॉलेजों तथा GNM ट्रेनिंग सेंटरों से उत्तीर्ण हो चुके पंजीकृत युवाओं से इजराइल जाने के लिए आवेदन मांगे गए थे।
इस भर्ती में आवेदकों को आकर्षित करने के लिए विज्ञापन में भारी-भरकम सुविधाओं का लालच दिया गया था, जिसमें शामिल हैं:
आकर्षक वेतन: प्रति माह ₹2 लाख तक की मोटी सैलरी का वादा।
अतिरिक्त सुविधाएं: पूरी तरह से मुफ्त आवास (Free Accommodation) और भोजन की व्यवस्था।
सुरक्षा कवच: व्यापक मेडिकल इंश्योरेंस की सुविधा।
केंद्र सरकार के निर्देशानुसार, देश भर के विभिन्न राज्यों से कुल 3500 ऐसे केयरगिवर (Home-Based Caregiver) इजराइल भेजे जाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन जैसे ही इस भर्ती की नियम और शर्तों का बारीक विवरण सामने आया, वैसे ही नर्सिंग अधिकारियों और डॉक्टरों के होश उड़ गए। ‘होम-बेस्ड केयरगिवर’ यानी गृह-आधारित देखभालकर्ता के नाम पर जारी इस विज्ञापन के जॉब प्रोफाइल में साफ तौर पर लिखा गया था कि चयनित उम्मीदवारों को बुजुर्गों या बीमारों की देखभाल के साथ-साथ नियोक्ता (Employer) के घर पर झाड़ू-पोछा (Cleaning), खाना बनाना (Cooking), कपड़े धोना (Washing) और अन्य सभी प्रकार के घरेलू काम करने होंगे।
🩺 नर्सिंग एसोसिएशन का कड़ा विरोध: “यह पेशे की गरिमा पर सीधा प्रहार है”
इस जॉब प्रोफाइल के सामने आते ही छत्तीसगढ़ नर्सिंग एसोसिएशन और डॉक्टरों की संस्थाएं खुलकर विरोध में उतर आई हैं। छत्तीसगढ़ नर्सिंग एसोसिएशन के महासचिव अमित रॉय ने इस नीति पर बेहद तीखे सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि GNM (General Nursing and Midwifery) और BSc Nursing जैसी डिग्रियां कोई साधारण सर्टिफिकेट नहीं हैं, बल्कि यह एक बेहद प्रतिष्ठित, कठिन और प्रोफेशनल हेल्थकेयर डिग्री है। एक प्रोफेशनल रजिस्टर्ड नर्स का मुख्य कार्य अस्पतालों में मरीजों की क्लीनिकल देखभाल करना और उनकी जान बचाना होता है।
नर्सिंग समुदाय का स्पष्ट तर्क है कि उच्च शिक्षित और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित नर्सों को विदेशों में झाड़ू-पोछा लगाने और खाना बनाने जैसे अकुशल (Unskilled) घरेलू कामों के लिए भेजना सीधे तौर पर नर्सिंग पेशे की गरिमा और उसकी पेशेवर पहचान (Professional Identity) को ठेस पहुंचाना है। एसोसिएशन ने मांग की है कि यदि सरकार युवाओं को विदेशी रोजगार के अवसर देना ही चाहती है, तो द्विपक्षीय समझौतों में यह शर्त जोड़ी जानी चाहिए कि हमारे नर्सिंग ग्रेजुएट्स को इजराइल के अस्पतालों में ‘नर्स’ के रूप में ही नियुक्त किया जाए, न कि किसी के घर में बंधुआ मजदूर या घरेलू नौकर (Caregiver) के रूप में।
🚀 युद्धग्रस्त क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर गहराती चिंताएं
इस भर्ती का दूसरा और सबसे ज्यादा डराने वाला पहलू है इजराइल की वर्तमान आंतरिक और भौगोलिक स्थिति। वर्तमान में इजराइल और उसके पड़ोसी क्षेत्रों में एक भीषण और सशस्त्र सैन्य संघर्ष (War Zone) चल रहा है। ऐसे गंभीर माहौल में छत्तीसगढ़ की बेटियों और बेटों को वहां भेजना उनकी जान को सीधे तौर पर जोखिम में डालना माना जा रहा है।
विपक्ष और मेडिकल सेल के नेताओं का कहना है कि जहां एक तरफ पश्चिम एशियाई देशों में सुरक्षा चिंताओं के कारण वहां पढ़ रहे भारतीय छात्र और काम कर रहे पेशेवर लगातार स्वदेश वापस लौट रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ सरकार हमारे युवाओं को युद्ध की आग में झोंकने के लिए विज्ञापन जारी कर रही है। शिकायतकर्ताओं ने राजभवन के सामने यह गंभीर सवाल उठाया है कि यदि युद्ध की स्थिति और ज्यादा बिगड़ती है या किसी भारतीय स्वास्थ्य कर्मी को कोई शारीरिक या मानसिक क्षति पहुंचती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? सरकार के पास आपातकालीन स्थिति में वहां से सुरक्षित बाहर निकालने (Evacuation Plan), विशेष बीमा दावों और कानूनी सुरक्षा को लेकर कोई भी स्पष्ट या पारदर्शी गाइडलाइन मौजूद नहीं है।
💸 आर्थिक शोषण और बिचौलियों का बढ़ता जाल
एक तरफ जहां राज्य के युवाओं में ₹2 लाख की सैलरी को लेकर उत्सुकता देखी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ इस भर्ती प्रक्रिया के नाम पर बड़े पैमाने पर होने वाले आर्थिक खर्चों ने भी आवेदकों की चिंता बढ़ा दी है। इस सरकारी प्रक्रिया के तहत भी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, मेडिकल टेस्ट, police क्लीयरेंस, वीजा औपचारिकताएं और हवाई यात्रा का पूरा खर्च खुद उम्मीदवार को ही उठाना पड़ रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में एक-एक उम्मीदवार के लाखों रुपये खर्च होने का अनुमान है।
इस भारी-भरकम खर्च के कारण राज्य में फर्जी एजेंटों, दलालों और ठगों का एक पूरा नेटवर्क सक्रिय हो गया है, जो सीधे-सादे ग्रामीण और शहरी युवाओं को इजराइल में नौकरी दिलाने के नाम पर एडवांस पैसों की ठगी कर रहे हैं। जिला रोजगार अधिकारियों को भी आधिकारिक तौर पर यह चेतावनी जारी करनी पड़ी है कि युवा किसी भी अनधिकृत बिचौलिए के झांसे में न आएं।
🏥 “घर में कमी, बाहर भेजने की जल्दी” — छत्तीसगढ़ के अस्पतालों का हाल
इस पूरे विवाद के बीच छत्तीसगढ़ कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने राज्य सरकार की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने डेटा साझा करते हुए कहा कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ के खुद के सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। राज्य की ग्रामीण जनता को सही इलाज के लिए नर्सों की कमी से जूझना पड़ रहा है। ऐसे समय में राज्य के भीतर स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार देने के बजाय, सरकार 3500 योग्य स्वास्थ्य कर्मियों को विदेश भेजने के लिए इतनी तत्परता क्यों दिखा रही है?
🔍 निष्कर्ष और आगे की राह
फिलहाल, राजभवन की दखलअंदाजी के बाद पूरे छत्तीसगढ़ में इस भर्ती पर एक बड़ा सवालिया निशान लग चुका है। मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर की ओर से आने वाली विस्तृत जांच रिपोर्ट ही अब यह तय करेगी कि क्या यह भर्ती प्रक्रिया इसी घरेलू काम वाले स्वरूप में आगे बढ़ेगी, या फिर नर्सिंग एसोसिएशन के भारी विरोध को देखते हुए सरकार को इस द्विपक्षीय समझौते के नियमों में कोई बड़ा बदलाव करना पड़ेगा। लेकिन एक बात पूरी तरह साफ है कि इस विवाद ने छत्तीसगढ़ की नर्सिंग बहनों और भाइयों के भविष्य, उनकी सुरक्षा और सबसे बढ़कर उनके पेशे की गरिमा को पूरे देश के सामने एक बड़ी बहस का विषय बना दिया है।

