ग्रेटर नोएडा दहेज कांड: क्या ‘थोड़ा एडजस्ट कर लो’ वाले समझौते ने ले ली दीपिका की जान? पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली पोल
हमारे समाज में एक बहुत पुरानी और बहुत ही खतरनाक बीमारी है। जब भी कोई बेटी ब्याह कर अपने ससुराल जाती है, और वहाँ अगर उसके साथ कुछ गलत होता है, मारपीट होती है, ताने दिए जाते हैं, तो वह रोते हुए अपने मां-बाप को फोन करती है। कहती है कि पापा, माँ, मुझे यहाँ प्रताड़ित किया जा रहा है। लेकिन जानते हैं हमारा समाज और हमारे माता-पिता उसे क्या जवाब देते हैं? वो कहते हैं कि बेटी, थोड़ा एडजस्ट कर लो। शुरुआत में ऐसा ही होता है, धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा। लोक-लाज का डर, समाज का डर, ‘लोग क्या कहेंगे’ का डर—यह डर इतना बड़ा हो जाता है कि हम अपनी बेटी की चीखों को अनसुना कर देते हैं। और इसी ‘थोड़ा एडजस्ट कर लो’ वाले समझौते की कीमत एक हंसती-खेलती, पढ़ी-लिखी बेटी की लाश बनकर सामने आती है। आज हम आपको ग्रेटर नोएडा की एक ऐसी ही बेटी दीपिका नागर की कहानी बताने जा रहे हैं, जो B.Ed पास थी, जिसका एक उज्ज्वल भविष्य हो सकता था, लेकिन दहेज के लालचियों ने उसकी जान ले ली।
शादी में खर्च हुए थे 1 करोड़, फिर भी हवस नहीं हुई शांत
मामला उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा का है। दीपिका नागर का विवाह दिसंबर 2024 में पूरे रीति-रिवाज के साथ हुआ था। दीपिका के पिता ने अपनी पूरी जिंदगी की जमा-पूंजी, अपनी औकात से कहीं बढ़कर करीब 1 करोड़ रुपये शादी में पानी की तरह बहा दिए! दहेज में चमचमाती स्कॉर्पियो गाड़ी दी और 15 लाख के जेवरात भी दिए। लेकिन इन लालचियों की हवस की पूर्ति कभी नहीं होती! शादी के कुछ ही दिन बीते थे कि ससुराल वालों ने एक नई मांग रख दी—एक फॉर्च्यूनर (Fortuner) गाड़ी और 51 lakh रुपये कैश! जब दीपिका ने अपने पिता की बेबसी का हवाला दिया, तो उसे कमरों में बंद किया जाने लगा, भूखा रखा गया और रोज बेरहमी से पीटा जाने लगा।
घटना वाले दिन का खौफनाक मंजर
घटना वाले दिन दोपहर में, जब दीपिका का रो-रोकर बुरा हाल था, उसके लाचार पिता खुद ग्रेटर नोएडा उसके ससुराल पहुँचे। दामाद और समधी के आगे हाथ जोड़े, पैर पकड़े कि ‘साहब, अब और पैसे नहीं हैं, मेरी बेटी को बख्श दो।’ रोती हुई बेटी को गले लगाकर ढांढस बंधाया कि सब ठीक हो जाएगा। पिता इसी उम्मीद में घर वापस लौटे, लेकिन उनके घर पहुँचे ही थे कि ससुराल वालों का फोन आया कि आपकी बेटी छत से नीचे गिर गई है, अस्पताल पहुँचो। और जब मायके वाले बदहवास हालत में अस्पताल पहुँचे, तो दीपिका दम तोड़ चुकी थी और ससुराल वाले उसकी लाश को लावारिस छोड़कर ताला लगाकर फरार हो चुके थे!
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला मौत का राज
ससुराल वालों ने कहानी रची कि दीपिका ने मानसिक तनाव में आकर खुदकुशी कर ली। लेकिन डॉक्टरों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस झूठ की धज्जियां उड़ा दीं! रिपोर्ट में साफ आया कि दीपिका के सिर के अंदर एक बहुत बड़ा ‘ब्लड क्लॉट’ यानी खून का थक्का जमा था, जो साफ बताता है कि नीचे गिराने से पहले उसके सिर पर किसी भारी चीज से वार किया गया था! इतना ही नहीं, उसके पेट के अंदर की प्लीहा (Spleen) पूरी तरह फटी हुई थी, जो यह साबित करती है कि मौत से पहले उसके पेट पर बेरहमी से लातें मारी गई थीं। यह आत्महत्या नहीं, एक सोची-समझी बर्बर हत्या थी! पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पति और ससुर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।
UP News Network की विशेष टिप्पणी: यह कहानी नहीं, समाज का कड़वा सच है
हम अपने पाठकों को बताना चाहते हैं कि UP News Network पिछले 3 दिनों से लगातार इस बेहद गंभीर मुद्दे पर खबरें लिख रहा है और आज हम फिर इसका जिक्र कर रहे हैं। हम आपको यह घटना इसलिए नहीं दिखा रहे हैं कि यह कोई मजेदार या मनोरंजक कहानी है जिसे लोग मजे लेकर पढ़ें। हम इसे इसलिए दिखा रहे हैं क्योंकि यह हमारे समाज की सबसे बड़ी और घिनौनी कुप्रथा है।
कड़वा सच यह है कि आज हमारे देश में बेटी पैदा बाद में होती है, उसकी शादी और दहेज की चिंता पहले शुरू हो जाती है। माता-पिता केवल इसी प्रकार की दर्दनाक घटनाओं को देखते हुए डर के साये में जीने लगते हैं। इसके लिए सरकार चाहे जितने भी कड़े कानून बना ले, कुछ नहीं होने वाला। जब तक समाज एकत्रित होकर इसे जड़ से नहीं उखाड़ेगा, तब तक दुनिया की कोई ताकत इसे खत्म नहीं कर सकती। समाज के जो मुख्य लोग हैं, जिम्मेदार लोग हैं, उन्हें अब सामने आना होगा, इसके बारे में सोचना होगा और इन लालचियों का सामाजिक बहिष्कार करना होगा। क्योंकि किसी भी शादी या रिश्ते को बचाने की कीमत, हमारी बेटी की अनमोल जिंदगी से बड़ी कभी नहीं हो सकती। अपनी बेटी का संबल बनिए, उसकी ढाल बनिए। अगर जरूरत पड़े तो उसे सम्मान के साथ वापस अपने घर ले आइए, लेकिन उसे भेड़ियों के आगे तड़पने के लिए मत छोड़िए।

