ग्रेटर नोएडा हादसा: स्कूल बस का इंतजार कर रहे बच्चों को कार ने रौंदा, बॉक्सिंग ट्रायल में भेदभाव के आरोप से खिलाड़ियों में रोष
ग्रेटर नोएडा हादसा में स्कूल बस का इंतजार कर रहे कई बच्चे घायल हुए, वहीं गौतमबुद्ध नगर के बॉक्सरों ने मंडलीय ट्रायल में भेदभाव का आरोप लगाकर चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
ग्रेटर नोएडा हादसा बुधवार, 8 जुलाई 2026 की सुबह उस समय चर्चा का विषय बन गया जब ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित पंचशील ग्रीन्स-2 सोसाइटी के बाहर एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में स्कूल बस का इंतजार कर रहे कई मासूम बच्चे घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक तेज रफ्तार कार चला रही महिला अचानक नियंत्रण खो बैठी और पहले सड़क किनारे खड़ी दो स्कूटी को टक्कर मार दी। इसके बाद कार सीधे उन बच्चों की ओर बढ़ गई जो अपने अभिभावकों के साथ स्कूल बस का इंतजार कर रहे थे।
हादसा इतना भयावह था कि एक बच्ची कुछ समय के लिए कार के नीचे फंस गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत दौड़कर बच्चों को बाहर निकाला और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पांच से अधिक बच्चों को चोटें आई हैं, जबकि कुछ अभिभावक भी घायल हुए हैं। सभी घायलों का इलाज अस्पताल में जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कार चला रही महिला अपने बच्चे को स्कूल छोड़ने जा रही थी। उनका आरोप है कि महिला मोबाइल फोन देखने में व्यस्त थी और इसी दौरान गलती से ब्रेक की जगह एक्सीलेटर पर पैर पड़ गया। हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा रहा है।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूलों के आसपास यातायात व्यवस्था को और सुरक्षित बनाया जाए। उनका कहना है कि सुबह के समय बड़ी संख्या में बच्चे और अभिभावक सड़क किनारे खड़े रहते हैं, इसलिए ऐसे क्षेत्रों में स्पीड कंट्रोल, ट्रैफिक पुलिस की तैनाती और अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।
इसी बीच गौतमबुद्ध नगर से खेल जगत से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। जिले के बॉक्सरों ने मेरठ में आयोजित होने वाले मंडलीय बॉक्सिंग ट्रायल की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है। खिलाड़ियों का आरोप है कि कई वर्षों से मंडलीय ट्रायल मेरठ में होने के कारण स्थानीय खिलाड़ियों को अनुचित लाभ मिलता है जबकि गौतमबुद्ध नगर सहित अन्य जिलों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता।
सोमवार को सूरजपुर स्थित मलकपुर स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित जिला स्तरीय बॉक्सिंग ट्रायल का कई खिलाड़ियों ने विरोध करते हुए बहिष्कार किया। खिलाड़ियों का कहना है कि यदि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं होगी तो मेहनत करने वाले खिलाड़ियों का मनोबल टूटेगा और खेल प्रतिभाओं को उचित मंच नहीं मिल पाएगा।
बॉक्सरों ने खेल विभाग से मांग की है कि भविष्य में मंडलीय ट्रायल किसी तटस्थ जिले में आयोजित किए जाएं या फिर पूरी चयन प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाए ताकि किसी प्रकार के पक्षपात की आशंका समाप्त हो सके। खिलाड़ियों का कहना है कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आगे भी शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे।
जिला स्तर के कई खिलाड़ियों ने खुलकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना है कि राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में चयन के दौरान पारदर्शिता बेहद आवश्यक है। यदि चयन प्रक्रिया पर ही सवाल उठने लगें तो खिलाड़ियों का खेल के प्रति विश्वास कमजोर पड़ जाता है। बॉक्सिंग कोच प्रमोद कुमार ने भी खिलाड़ियों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि खेल विभाग को उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुनना चाहिए।
एक ओर जहां ग्रेटर नोएडा हादसा ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं, वहीं दूसरी ओर बॉक्सिंग खिलाड़ियों का विरोध खेल चयन प्रणाली में पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर करता है। दोनों घटनाएं प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश हैं कि सुरक्षा और निष्पक्षता किसी भी व्यवस्था की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाएं तो सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है और खेल प्रतिभाओं को भी समान अवसर मिल सकते हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासन और खेल विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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