शादी या बेटियों का कसाईखाना? UPNN का समाज से कड़ा सवाल— आख़िर हर बार लाश बेटी की ही क्यों उठती है?
ग्रेटर नोएडा (UPNN): इस देश में शादियों का बाज़ार सजता है, रसूख के तमगे दिखाए जाते हैं, और कानून की बड़ी-बड़ी डिग्रियां ली जाती हैं। लेकिन इन सबके बीच इंसानियत घुटने टेक देती है। आज एक लाड़ली का बाप अपनी पूरी जिंदगी की गाढ़ी कमाई, अपनी जमीन, अपना सब कुछ इस शादी के बाजार में न्योक्षावर कर देता है। विदाई के वक्त उसकी आंख से बहते आंसू इस बात की गवाही देते हैं कि उसने अपने कलेजे के टुकड़े को विदा नहीं किया, बल्कि एक ऐसे कुएं में धकेल दिया है जहां से सिर्फ लाशें वापस आती हैं।
प्रतिदिन आ रही ख़ौफ़नाक ख़बरें और समाज की खामोशी
पिछले कुछ दिनों में हमारे आसपास से जो दिल दहला देने वाली घटनाएं सामने आई हैं, चाहे वो दादरी का मामला हो या देश के अन्य हिस्सों से आने वाली ख़बरें, इन्हें देखकर मन बहुत ज़्यादा व्यथित और चिंतित है। इन समस्याओं का समाधान कौन करेगा? जब इन मुद्दों पर खुलकर बात की जाती है, तो कुछ लोग सोशल मीडिया पर ‘दोनों तरफ की बात सुनो’ का ज्ञान देने आ जाते हैं।
UP News Network आज ऐसे तमाम ज्ञानबांटने वालों से और इस पूरे समाज से एक सीधा प्रश्न करना चाहता है— चलिए, हम दोनों तरफ से सोच लेते हैं, लेकिन कोई इस बात का जवाब दे दे कि हर बार आख़िर में लाश बेटी की ही क्यों उठती है? मरती सिर्फ बेटी ही क्यों है? बेटा क्यों नहीं मरता? अगर इन बेटियों के मन में ज़रा सा भी कोई गलत इरादा होता या ये शातिर होतीं, तो शायद आज ये ज़िंदा होतीं। लेकिन ये बेबस थीं। यह खुदकुशी नहीं, बल्कि इस समाज और दहेज लोभी रसूखदारों द्वारा मिलकर किया गया एक सोची-समझी साजिश के तहत कत्ल है।
शर्मनाक: रसूख की आड़ में घुट रहा मासूमों का दम
इस पूरे मामले का सबसे घिनौना और शर्मनाक पहलू देखिए कि ये सब उन लोगों के घरों में भी हो रहा है जो अदालतों में बैठकर दुनिया को न्याय का पाठ पढ़ाते हैं। जहाँ पति नामचीन क्रिमिनल लॉयर हैं और सास रिटायर्ड जज हैं। जो लोग कोर्ट रूम में दूसरों की जिंदगी का फैसला करते हैं, उनके अपने घर की चारदीवारी के भीतर एक मासूम बेटी न्याय की भीख मांगते-मांगते दम तोड़ देती है। क्या इसी रसूखदार टैग के दम पर आज इन चीखों को, इन कत्लों को एक आम खुदकुशी बताने की साजिश रची जा रही है?
आखिर क्यों इस देश के उन नकारा, नालायक और निकम्मे लड़कों का पेट कभी नहीं भरता, जिनकी अपनी खुद की व्यक्तिगत काबिलियत या औकात zero होती है? जो खुद एक रुपया कमाने के काबिल नहीं होते, लेकिन दूल्हा बनते ही भीख मांगने बैठ जाते हैं। उन्हें फॉर्च्यूनर चाहिए, स्कॉर्पियो चाहिए, करोड़ों का कैश और आलीशान प्रॉपर्टी चाहिए। इन दहेज के भूखे भेड़ियों के हौसले इतने बुलंद हैं क्योंकि इन्हें कानून का कोई डर नहीं है।
UP News Network की देश के हर माता-पिता से कड़क अपील
हमारी देश के हर भाई, हर बाप और हर माता-पिता से हाथ जोड़कर यह सीधी अपील है— जिस भी घर में शादी तय करते समय या शादी के बाद, एक रुपए की भी भीख या दहेज की डिमांड की जाए, उस घर के दरवाजे पर लात मार दीजिए! अपनी बेटी को ऐसे कसाईखाने में ब्याहने से हजार गुना बेहतर है कि उसे अपने घर की रानी बनाकर रखिए, उसे अपने पैरों पर खड़ा कीजिए। किसी भी बेटी की अस्मत और उसकी जान की कीमत, इन भीखमंगे लड़कों की गाड़ियों और पैसों से बहुत बड़ी है।
हम प्रशासन और सरकारों से पुरजोर मांग करते हैं कि खाकी और खादी के पीछे छिपी इन रसूखदार ससुराल वालों की ताकत को कड़े एक्शन से कुचला जाए, ताकि भविष्य में देश की किसी भी दूसरी बेटी को बेबसी में अपनी जान न गंवानी पड़े।

